1. फलों की खेती और हाईटेक नर्सरी पर 40-50% तक सब्सिडी
प्रदेश में बागवानी का रकबा बढ़ाने के लिए किसानों को आधुनिक पौधशालाएं स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। योजना के तहत छोटी नर्सरी स्थापित करने पर 50 प्रतिशत तक, जबकि बड़ी नर्सरी, हाईटेक नर्सरी और टिश्यू कल्चर लैब जैसी परियोजनाओं पर 40 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध है।
इसके अलावा आम, केला, अमरूद, ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी और करौंदा जैसी अधिक आय देने वाली फसलों के नए बाग लगाने पर भी 40 प्रतिशत तक आर्थिक सहायता दी जा रही है। संकर सब्जियों, फूलों और मसाला फसलों की खेती को भी योजना में शामिल किया गया है ताकि किसान पारंपरिक खेती के साथ अतिरिक्त आमदनी का स्रोत तैयार कर सकें।
2. कृषि यंत्रों और मधुमक्खी पालन पर भी मिलेगा लाभ
सरकार खेती को तकनीक से जोड़ने के लिए आधुनिक कृषि उपकरणों की खरीद पर भी सहायता दे रही है। ट्रैक्टर, पावर टिलर, नैपसेक स्प्रेयर, समेकित कीट प्रबंधन (IPM) उपकरण और पर्यावरण अनुकूल कीट नियंत्रण साधनों पर 40 से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान किया गया है।
इसके साथ ही मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए हनी बी कॉलोनी, बी-हाइव और अन्य आवश्यक उपकरणों पर भी वित्तीय सहायता दी जा रही है। इससे किसानों को शहद उत्पादन के जरिए अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा।
3. कोल्ड स्टोरेज, पॉलीहाउस और पैक हाउस के लिए 35-50% तक सहायता
फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए सरकार पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट पर निवेश बढ़ा रही है। किसानों को कोल्ड स्टोरेज, कोल्ड रूम, पैक हाउस और राइपनिंग चैंबर जैसी सुविधाएं विकसित करने के लिए 35 से 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।
वहीं नियंत्रित वातावरण में खेती करने वाले किसानों के लिए पॉलीहाउस, ग्रीनहाउस और शेडनेट हाउस स्थापित करने पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध है। इन तकनीकों से मौसम का जोखिम कम होता है और उच्च गुणवत्ता वाली फसल तैयार होती है, जिससे बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ती है।
4. SC-ST क्षेत्रों के छोटे किसानों को 75% तक बंपर अनुदान
सरकार ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों के छोटे और सीमांत किसानों के लिए विशेष प्रावधान किए हैं। अधिकतम 0.20 हेक्टेयर भूमि वाले पात्र किसानों को शाकभाजी बीज, मसाला बीज, मशरूम उत्पादन सामग्री, जैव उर्वरक और कृषि यंत्रों पर 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। इस विशेष सहायता का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ना, उत्पादन बढ़ाना और उनकी आय में स्थायी सुधार लाना है।

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