1. सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन की गारंटी
नई वेतन संहिता लागू होने के बाद सभी पात्र श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने की व्यवस्था होगी। इसके साथ ही समान काम करने वाले पुरुष और महिला कर्मचारियों को समान वेतन देने का प्रावधान प्रभावी होगा। ओवरटाइम करने पर कर्मचारियों को सामान्य वेतन की तुलना में दोगुना भुगतान मिलेगा। वहीं कुल वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा मूल वेतन (बेसिक सैलरी) के रूप में निर्धारित करने का प्रावधान भी किया गया है।
2. नौकरी की सुरक्षा और कर्मचारियों के नए अधिकार
औद्योगिक संबंध संहिता के तहत निश्चित अवधि (फिक्स्ड टर्म) पर नियुक्त कर्मचारियों को भी स्थायी कर्मचारियों के समान कई सुविधाएं मिल सकेंगी। एक वर्ष की सेवा पूरी करने पर ग्रेच्युटी का लाभ देने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा श्रम विवादों के त्वरित निस्तारण के लिए न्यायाधिकरण की व्यवस्था को भी मजबूत बनाया जाएगा। हड़ताल से पहले निर्धारित नोटिस देने और कुछ औद्योगिक नियमों में बदलाव की भी व्यवस्था की गई है।
3. गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा का लाभ
नई सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत पहली बार ऐप आधारित और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़े कामगारों को भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की तैयारी है। इससे ऐसे लाखों श्रमिकों को भविष्य में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलने का रास्ता खुलेगा, जो अब तक पारंपरिक श्रम कानूनों के दायरे से बाहर थे।
4. कार्यस्थल पर सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार
व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाओं से जुड़ी नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा। 40 वर्ष से अधिक आयु के श्रमिकों की नियमित स्वास्थ्य जांच कराई जाएगी। महिलाओं को सुरक्षा मानकों के साथ सभी शिफ्टों में काम करने की अनुमति मिलेगी। साथ ही प्रतिदिन आठ घंटे और सप्ताह में 48 घंटे कार्य अवधि का प्रावधान लागू रहेगा। यदि किसी दुर्घटना या मृत्यु के मामले में जुर्माना लगाया जाता है, तो उसका एक बड़ा हिस्सा पीड़ित या उसके परिवार को देने की व्यवस्था भी की गई है।
पारदर्शी और डिजिटल होगी पूरी व्यवस्था
नई श्रम संहिताओं के लागू होने के बाद कई प्रक्रियाएं ऑनलाइन की जाएंगी, जिससे पंजीकरण, रिकॉर्ड और अन्य औपचारिकताओं में पारदर्शिता बढ़ेगी। सरकार का उद्देश्य श्रम कानूनों को सरल बनाना, कर्मचारियों के अधिकारों को मजबूत करना और बदलते रोजगार ढांचे के अनुरूप आधुनिक व्यवस्था तैयार करना है।
यदि कैबिनेट से मंजूरी मिल जाती है, तो उत्तर प्रदेश में श्रमिकों से जुड़े कई पुराने नियमों की जगह नई श्रम संहिताएं लागू हो जाएंगी। इससे प्रदेश के लाखों श्रमिकों, कर्मचारियों और नए रोजगार क्षेत्रों से जुड़े लोगों को सीधे तौर पर लाभ मिलने की उम्मीद है।

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