राज्य के कई इलाकों में कम बारिश और सूखे जैसे हालात को देखते हुए सरकार ने कृषि बिजली व्यवस्था को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। पर्याप्त सिंचाई उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एग्रीकल्चर फीडरों के संचालन को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसानों को जरूरत के समय बिजली की कमी का सामना न करना पड़े।
किसानों को मिलेगी सस्ती बिजली
बिहार सरकार कृषि उपभोक्ताओं को रियायती दर पर बिजली उपलब्ध करा रही है। वर्तमान व्यवस्था के तहत किसानों को करीब 55 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल रही है। सरकार के अनुसार इस पर लगभग 93 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। इसका उद्देश्य सिंचाई का खर्च कम करना और किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाना है।
एग्रीकल्चर फीडर तैयार
राज्य में अब तक 2,700 से ज्यादा एग्रीकल्चर फीडर स्थापित किए जा चुके हैं। इन फीडरों के जरिए कृषि कार्यों के लिए अलग बिजली आपूर्ति की व्यवस्था की गई है, जिससे घरेलू बिजली आपूर्ति प्रभावित हुए बिना किसानों को समय पर सिंचाई के लिए बिजली मिल सके।
सौर ऊर्जा पर भी फोकस
ऊर्जा क्षेत्र की समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री कुसुम (PM-KUSUM) योजना के तहत कृषि फीडरों के सोलराइजेशन की प्रगति पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा आधारित बिजली व्यवस्था का तेजी से विस्तार किया जाए। इससे भविष्य में किसानों को कम लागत पर स्वच्छ और स्थायी ऊर्जा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
किसानों को बड़ी राहत
बिहार में बड़ी संख्या में किसान सिंचाई के लिए बिजली पर निर्भर हैं। ऐसे में 12 घंटे नियमित बिजली आपूर्ति, रियायती दर और कृषि फीडरों के विस्तार से खेती को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो विशेष रूप से कम वर्षा वाले क्षेत्रों के किसानों को बड़ा लाभ मिल सकता है।

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