भारत के लिए बड़ी खुशखबरी! अब ऑस्ट्रेलिया देगा यूरेनियम

नई दिल्ली: भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। दोनों देशों के बीच आयोजित तीसरे वार्षिक शिखर सम्मेलन में ऊर्जा, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर कई अहम निर्णय लिए गए। सबसे बड़ी घोषणा परमाणु ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी रही, जिसके तहत ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की आपूर्ति का मार्ग और मजबूत होगा। इस कदम को भारत की स्वच्छ ऊर्जा नीति और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

परमाणु ऊर्जा सहयोग को मिला नया विस्तार

शिखर वार्ता के दौरान दोनों देशों ने परमाणु ऊर्जा सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। इस समझ के बाद भारत अपने शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम प्राप्त कर सकेगा। इससे देश में परमाणु ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में नई संभावनाएं खुलेंगी।

स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य को मिलेगा समर्थन

भारत आने वाले वर्षों में बिजली उत्पादन में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी लगातार बढ़ाने पर काम कर रहा है। परमाणु ऊर्जा को कम कार्बन उत्सर्जन वाला ऊर्जा स्रोत माना जाता है। ऐसे में यूरेनियम की नियमित उपलब्धता से नए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को ईंधन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और ऊर्जा क्षेत्र को स्थिरता मिल सकती है।

सुरक्षा और रक्षा सहयोग पर भी जोर

बैठक में दोनों प्रधानमंत्रियों ने बदलते वैश्विक हालात को देखते हुए सुरक्षा और रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, समुद्री सुरक्षा और आपसी रणनीतिक सहयोग को भविष्य की साझेदारी का अहम आधार बताया गया।

2015 के समझौते को मिला नया बल

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वर्ष 2015 में हुए परमाणु सहयोग समझौते के तहत शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम निर्यात का रास्ता तैयार हुआ था। अब दोनों देशों ने इस व्यवस्था को आगे बढ़ाने की दिशा में आवश्यक प्रक्रियाओं की पुष्टि की है, जिससे सहयोग को व्यावहारिक रूप से और गति मिलने की उम्मीद है।

भारत को क्या होगा फायदा?

दरअसल, ऑस्ट्रेलिया दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम भंडार वाले देशों में शामिल है। ऐसे में वहां से ईंधन की उपलब्धता भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को दीर्घकालिक आधार दे सकती है। इससे ऊर्जा स्रोतों में विविधता आएगी, आयात व्यवस्था अधिक भरोसेमंद बनेगी और स्वच्छ बिजली उत्पादन बढ़ाने की योजनाओं को भी गति मिल सकती है।

0 comments:

Post a Comment