यूपी सरकार की 5 बड़ी तैयारी: ग्रामीण इलाकों में होगी लागू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में अनियोजित निर्माण पर रोक लगाने और गांवों का व्यवस्थित विकास सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। पंचायती राज विभाग ने 'उत्तर प्रदेश जिला पंचायत मॉडल भवन निर्माण एवं विकास उपविधियां-2026' तैयार कर ली हैं, जिन्हें जल्द ही प्रदेश की जिला पंचायतों में लागू किए जाने की तैयारी है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाले आवासीय और व्यावसायिक भवनों के लिए भी तय मानकों के अनुसार निर्माण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

हितधारकों से सुझाव लेने के बाद अंतिम चरण में प्रस्ताव

विभाग ने इस मसौदे पर बिल्डरों, वास्तुविदों और जिला पंचायतों के अधिकारियों से सुझाव और आपत्तियां मांगी थीं। प्राप्त सुझावों की समीक्षा के बाद संशोधित प्रस्ताव विभागीय मंत्री के अनुमोदन के लिए भेज दिया गया है। मंजूरी मिलते ही सभी जिला पंचायतें इसे अपने-अपने क्षेत्रों में लागू करेंगी। इससे पहली बार ग्रामीण इलाकों में भवन निर्माण के लिए एक समान नियम लागू हो जाएंगे।

खुले स्थान के लिए तय किए गए नए मानक

नई उपविधियों के तहत गांवों में बनने वाले आवासीय भवनों के लेआउट में कम से कम 15 प्रतिशत खुला क्षेत्र छोड़ना अनिवार्य होगा। वहीं व्यावसायिक भवनों के लिए न्यूनतम 10 प्रतिशत खुली जगह रखना जरूरी होगा। सरकार का मानना है कि इससे भविष्य में सड़क, जल निकासी, पार्किंग और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के विकास में आसानी होगी।

छोटे भवनों को मिलेगी बड़ी राहत

सरकार ने छोटे निर्माण कार्यों के लिए लोगों को बड़ी राहत देने का भी प्रस्ताव रखा है। यदि कोई व्यक्ति 250 वर्गमीटर तक का आवासीय भवन या 60 वर्गमीटर तक का व्यावसायिक भवन बनाता है, तो उसे मानचित्र स्वीकृत कराने की जरूरत नहीं होगी। ऐसे मामलों में केवल संबंधित जिला पंचायत को सूचना देना पर्याप्त होगा। इसके अलावा प्लास्टर, फ्लोरिंग, सनशेड, चहारदीवारी जैसे सामान्य निर्माण कार्यों के लिए भी अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। होम स्टे और पेइंग गेस्ट हाउस संचालित करने वालों को भी अतिरिक्त भवन अनुमति से छूट देने का प्रस्ताव है।

पहली बार लगेगा विकास शुल्क

नई व्यवस्था लागू होने के बाद जिला पंचायतें पहली बार भवन मानचित्र स्वीकृत करने पर विकास शुल्क और अंबार शुल्क वसूलेंगी। प्रस्ताव के अनुसार प्रदेश के जिलों को तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा और 250 रुपये से 750 रुपये प्रति वर्गमीटर तक विकास शुल्क लिया जा सकेगा।

हाईवे और शहरों के आसपास देना होगा ज्यादा शुल्क

प्रस्तावित नियमों में कुछ क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त विकास शुल्क भी निर्धारित किया गया है। नेशनल हाईवे, एक्सप्रेसवे और स्टेट हाईवे के दोनों ओर 500 मीटर तक तथा नगर निगम, नगर पालिका परिषद और विकास प्राधिकरण की सीमा से 3 किलोमीटर के दायरे में भवन निर्माण कराने पर सामान्य शुल्क की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक विकास शुल्क देना पड़ सकता है। इसका उद्देश्य तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में योजनाबद्ध निर्माण को बढ़ावा देना है।

0 comments:

Post a Comment