1. ब्लड शुगर टेस्ट
30 की उम्र के बाद मधुमेह का खतरा बढ़ सकता है, खासकर यदि परिवार में पहले से डायबिटीज का इतिहास हो या वजन अधिक हो। ऐसे में साल में कम से कम एक बार फास्टिंग ब्लड शुगर या HbA1c टेस्ट कराना फायदेमंद माना जाता है। इससे रक्त में शुगर के स्तर का पता चलता है और प्रीडायबिटीज या डायबिटीज की समय रहते पहचान हो सकती है।
2. थायरॉयड प्रोफाइल
महिलाओं में थायरॉयड संबंधी समस्याएं पुरुषों की तुलना में अधिक देखने को मिलती हैं। लगातार थकान, वजन बढ़ना या घटना, बाल झड़ना, अनियमित पीरियड्स और मूड में बदलाव इसके संकेत हो सकते हैं। इसलिए 30 वर्ष के बाद समय-समय पर TSH सहित थायरॉयड जांच कराना उपयोगी हो सकता है।
3. सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग
सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए पैप स्मीयर एक महत्वपूर्ण जांच मानी जाती है। विशेषज्ञ आमतौर पर 21 वर्ष की आयु से या यौन जीवन शुरू होने के बाद निर्धारित अंतराल पर यह जांच कराने की सलाह देते हैं। 30 वर्ष के बाद डॉक्टर की सलाह के अनुसार HPV टेस्ट के साथ इसकी स्क्रीनिंग भी कराई जा सकती है।
4. ब्रेस्ट जांच (Breast Screening)
30 वर्ष के बाद महिलाओं को स्वयं स्तनों की जांच (Self Breast Examination) करने की आदत डालनी चाहिए। यदि किसी तरह की गांठ, दर्द या असामान्य बदलाव महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर क्लिनिकल ब्रेस्ट एग्जाम, अल्ट्रासाउंड या उम्र और जोखिम के आधार पर मैमोग्राफी की सलाह दे सकते हैं।
5. ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल टेस्ट
उच्च रक्तचाप और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल लंबे समय तक बिना लक्षण के भी रह सकते हैं, लेकिन ये हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकते हैं। इसलिए 30 वर्ष के बाद नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच और लिपिड प्रोफाइल कराना लाभदायक माना जाता है, विशेषकर यदि परिवार में हृदय रोग का इतिहास हो।
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