बिहार सरकार का फैसला, जमीन मालिकों के लिए 2 बड़ी खुशखबरी

पटना: बिहार सरकार ने भूमि विवादों और राजस्व न्यायालयों की प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने नई व्यवस्था लागू करते हुए स्पष्ट किया है कि अब राजस्व न्यायालयों में मामलों की सुनवाई के दौरान कागजी दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं होगी। इसके साथ ही सभी मामलों का निपटारा ऑनलाइन उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर किया जाएगा।

1. अब फिजिकल दस्तावेज नहीं, केवल ऑनलाइन रिकॉर्ड होगा मान्य

नई व्यवस्था के तहत राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली (RCMS) में दर्ज मामलों की सुनवाई के दौरान किसी भी पक्ष से कागजी दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे। सभी जरूरी प्रमाण और रिकॉर्ड संबंधित पक्षकारों को पोर्टल पर ही अपलोड करने होंगे। न्यायालय भी केवल उसी डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर सुनवाई और निर्णय करेगा। यदि किसी मामले में अतिरिक्त दस्तावेज की आवश्यकता होगी, तो संबंधित व्यक्ति को भी पोर्टल के माध्यम से ही नए दस्तावेज अपलोड करने के लिए कहा जाएगा। इससे पूरी प्रक्रिया एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित होगी।

2. कार्यालयों के चक्कर होंगे कम, बढ़ेगी पारदर्शिता

सरकार का दूसरा बड़ा उद्देश्य लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देना है। डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद दस्तावेज सुरक्षित ऑनलाइन उपलब्ध रहेंगे, जिससे रिकॉर्ड खोने, बदलने या विवाद की संभावना काफी कम हो जाएगी। इसके अलावा पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से मामलों की निगरानी आसान होगी और पारदर्शिता भी बढ़ेगी। इससे जमीन मालिकों को समय और खर्च दोनों की बचत होने की उम्मीद है।

अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी जिलों के संबंधित अधिकारियों को नई व्यवस्था का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने साफ किया है कि निर्धारित प्रक्रिया से हटकर किसी भी स्तर पर कागजी दस्तावेज लेने की अनुमति नहीं होगी। यदि कहीं नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

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