330 किलोमीटर लंबा होगा एक्सप्रेसवे
प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे की लंबाई करीब 320 से 330 किलोमीटर रखी गई है। इसे छह लेन के रूप में विकसित करने की योजना है, जिसे भविष्य में आवश्यकता के अनुसार और विस्तारित भी किया जा सकता है। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 22,400 करोड़ रुपये बताई जा रही है। फिलहाल रूट का तकनीकी अध्ययन और व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
इन 6 जिलों को मिलेगा सीधा लाभ
इस एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा फायदा मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही, प्रयागराज, जौनपुर और प्रतापगढ़ जैसे जिलों को मिलने की संभावना है। इसके अलावा विंध्य क्षेत्र के अन्य इलाकों की कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी। सड़क बनने के बाद इन जिलों से प्रदेश के प्रमुख शहरों तक पहुंचने में पहले की तुलना में काफी कम समय लगेगा।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा सहारा
विंध्य क्षेत्र धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। नया एक्सप्रेसवे बनने के बाद लखनऊ, कानपुर, नोएडा, दिल्ली-एनसीआर और अन्य शहरों से आने वाले यात्रियों का सफर अधिक तेज और सुविधाजनक हो जाएगा। इससे धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिलने की संभावना है।
अभी शुरुआती चरण में है परियोजना
वर्तमान में परियोजना की प्री-फिजिबिलिटी स्टडी और डीपीआर तैयार की जा रही है। साथ ही ऐसा रूट तय करने पर काम चल रहा है जिससे वन क्षेत्र और पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। भूमि अधिग्रहण और अंतिम एलाइनमेंट जैसी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा।

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