60% जमीन का अधिग्रहण पूरा
यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में इस परियोजना के लिए करीब 740 एकड़ भूमि की आवश्यकता है, जो 16 गांवों में फैली हुई है। अब तक लगभग 60 प्रतिशत जमीन किसानों की सहमति से खरीदी जा चुकी है। शेष भूमि का अधिग्रहण भी तेजी से किया जा रहा है, ताकि निर्माण कार्य निर्धारित समय में शुरू हो सके।
73.4 किमी लंबा होगा एक्सप्रेसवे
यह लिंक एक्सप्रेसवे 73.4 किलोमीटर लंबा होगा और यमुना एक्सप्रेसवे के 24.8 किलोमीटर प्वाइंट पर आकर जुड़ेगा। मुख्य एक्सप्रेसवे की चौड़ाई 80 मीटर रखी जाएगी, जबकि दोनों ओर सर्विस रोड के साथ कुल कॉरिडोर की चौड़ाई 130 मीटर होगी। इससे स्थानीय यातायात और लंबी दूरी के वाहनों के लिए अलग-अलग सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
₹1,209 करोड़ से हो रहा भूमि अधिग्रहण
भूमि खरीद की प्रक्रिया को गति देने के लिए ₹1,209 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। इस राशि का उपयोग किसानों से सहमति के आधार पर जमीन खरीदने में किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि अधिग्रहण प्रक्रिया बिना विवाद के पूरी हो और परियोजना में किसी प्रकार की देरी न आए।
इन जिलों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
इस लिंक एक्सप्रेसवे के बनने से गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मेरठ, हापुड़, अमरोहा, संभल, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज समेत गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़े कई जिलों के लोगों को तेज और सुगम कनेक्टिविटी मिलेगी। खासतौर पर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक यात्रा का समय कम होगा और व्यापार, पर्यटन तथा निवेश को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

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