8वें वेतन आयोग में बड़ा अपडेट! कर्मचारियों ने रखीं 7 बड़ी मांगें, अब सरकार की बारी

नई दिल्ली: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। आयोग इस समय कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और अन्य हितधारकों से सुझाव प्राप्त कर रहा है। इसी क्रम में ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) ने वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों में बदलाव को लेकर सात प्रमुख मांगें आयोग के समक्ष रखी हैं।

1. फिटमेंट फैक्टर 2.05 से बढ़ाकर 2.10 करने की मांग

कर्मचारी संगठन ने 8वें वेतन आयोग से फिटमेंट फैक्टर को 2.05 से बढ़ाकर 2.10 करने का सुझाव दिया है। फिटमेंट फैक्टर ही वह आधार होता है, जिसके अनुसार कर्मचारियों की नई बेसिक सैलरी तय की जाती है। संगठन का कहना है कि इससे बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों को बेहतर आर्थिक राहत मिल सकती है।

2. लेवल-1 कर्मचारियों की सैलरी में 65% तक वृद्धि

फेडरेशन का कहना है कि यदि उसके प्रस्तावों को स्वीकार किया जाता है, तो लेवल-1 कर्मचारियों का मासिक वेतन लगभग ₹37,080 से बढ़कर करीब ₹61,344 तक पहुंच सकता है। यानी वेतन में करीब 65 प्रतिशत तक वृद्धि की संभावना जताई गई है। हालांकि यह कर्मचारी संगठन का अनुमान है, सरकार की स्वीकृति अभी बाकी है।

3. HRA में बढ़ोतरी का प्रस्ताव

संगठन ने मकान किराया भत्ता (HRA) की दरों में संशोधन की भी मांग की है। X श्रेणी के शहर: 36%, Y श्रेणी के शहर: 24%, Z श्रेणी के शहर: 12%, इसके अलावा सुझाव दिया गया है कि जब भी महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी हो, उसी समय HRA की दरों की भी स्वतः समीक्षा की जाए।

4. ट्रांसपोर्ट अलाउंस ₹9,000 प्रति माह करने की मांग

कर्मचारी संगठन ने विशेष रूप से लेवल-1 कर्मचारियों के लिए न्यूनतम ₹9,000 प्रतिमाह ट्रांसपोर्ट अलाउंस निर्धारित करने का प्रस्ताव दिया है। संगठन का तर्क है कि बढ़ती ईंधन कीमतों और यात्रा खर्च को देखते हुए वर्तमान परिवहन भत्ता पर्याप्त नहीं रह गया है।

5. परिवार के आकार में बदलाव का सुझाव

वेतन निर्धारण के फॉर्मूले में वर्तमान में 3 सदस्यों के परिवार का आधार माना जाता है। कर्मचारी संगठन ने इसे बढ़ाकर 4.4 सदस्य करने की मांग की है। साथ ही आश्रित माता-पिता को भी इस गणना में शामिल करने का सुझाव दिया गया है, ताकि वास्तविक पारिवारिक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखा जा सके।

6. भत्तों और वेतन संरचना की व्यापक समीक्षा

फेडरेशन ने आयोग से अनुरोध किया है कि केवल मूल वेतन ही नहीं, बल्कि विभिन्न भत्तों, सेवा सुविधाओं और वेतन संरचना की भी मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार समीक्षा की जाए। उनका मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में जीवन-यापन का खर्च काफी बढ़ा है।

7. रिपोर्ट कब आ सकती है?

सरकार ने आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए करीब 18 महीने का समय दिया है। अनुमान है कि आयोग 2027 की पहली छमाही में अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंप सकता है। इसके बाद सरकार रिपोर्ट की समीक्षा करेगी और मंजूरी मिलने पर नई वेतन व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी। पिछले वेतन आयोगों के अनुभव को देखें तो सिफारिशें लागू होने में अतिरिक्त समय भी लग सकता है।

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