इस बीच विभिन्न कर्मचारी संगठन आयोग के सामने कई अहम सुझाव और मांगें रख रहे हैं। यदि इन प्रस्तावों को सरकार स्वीकार करती है, तो कर्मचारियों की सैलरी, भत्तों और पेंशन में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि नीचे बताए गए सभी बदलाव अभी प्रस्ताव और संभावित सिफारिशों के आधार पर हैं। अंतिम निर्णय केंद्र सरकार द्वारा आयोग की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद ही लिया जाएगा।
1. न्यूनतम मूल वेतन में बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद
वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपये है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए इसमें उल्लेखनीय वृद्धि की जानी चाहिए। कुछ संगठनों ने इसे 69,000 रुपये तक करने की मांग रखी है, जबकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम राशि इससे कम लेकिन मौजूदा वेतन से काफी अधिक हो सकती है।
2. फिटमेंट फैक्टर बढ़ने से पूरी सैलरी पर असर
फिटमेंट फैक्टर वह आधार होता है जिसके जरिए कर्मचारियों के नए वेतन की गणना की जाती है। 7वें वेतन आयोग में यह 2.57 था। अब कर्मचारी संगठन 2.86 से लेकर 3.83 तक फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। यदि सरकार इस पर सकारात्मक फैसला लेती है तो केवल बेसिक पे ही नहीं, बल्कि कुल वेतन संरचना में भी बड़ा इजाफा हो सकता है।
3. टेक-होम सैलरी में 60 से 70 प्रतिशत तक
बढ़े हुए बेसिक पे, नए फिटमेंट फैक्टर और संशोधित भत्तों का संयुक्त असर कर्मचारियों की मासिक आय पर दिखाई देगा। अनुमान है कि शुरुआती स्तर के कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी में 60 से 70 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी संभव हो सकती है। हालांकि वास्तविक बढ़ोतरी आयोग की अंतिम सिफारिशों और सरकारी मंजूरी पर निर्भर करेगी।
4. हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में संशोधन
महानगरों और अन्य शहरों में लगातार बढ़ते किराए को देखते हुए कर्मचारी संगठनों ने HRA की दरों में संशोधन की मांग की है। प्रस्ताव के अनुसार एक्स श्रेणी के शहरों में 36 प्रतिशत, वाई श्रेणी में 24 प्रतिशत और जेड श्रेणी के शहरों में 12 प्रतिशत HRA देने का सुझाव रखा गया है। यदि इसे मंजूरी मिलती है तो किराए के मकान में रहने वाले कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा।
5. ट्रांसपोर्ट अलाउंस बढ़ाने की मांग
दैनिक यात्रा का खर्च लगातार बढ़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए शुरुआती स्तर के कर्मचारियों के लिए भी न्यूनतम 9,000 रुपये प्रतिमाह ट्रांसपोर्ट अलाउंस देने का प्रस्ताव रखा गया है। इससे कर्मचारियों पर आने-जाने का आर्थिक बोझ कम हो सकता है।
6. पेंशनभोगियों को भी मिल सकती है बड़ी राहत
8वें वेतन आयोग से केवल कार्यरत कर्मचारी ही नहीं बल्कि लाखों पेंशनभोगी भी उम्मीद लगाए बैठे हैं। कर्मचारी संगठनों का सुझाव है कि न्यूनतम पेंशन को वर्तमान 9,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये या उससे अधिक किया जाए। यदि ऐसा होता है तो सेवानिवृत्त कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आ सकता है।
7. MACP और प्रमोशन नियमों में बदलाव संभव
कर्मचारी संगठनों ने मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (MACP) योजना में सुधार की भी मांग की है। प्रस्ताव है कि कर्मचारियों को समय पर बेहतर वेतन उन्नयन मिले और प्रमोशन मिलने पर अतिरिक्त आर्थिक लाभ सुनिश्चित किया जाए। इससे लंबे समय तक एक ही पद पर कार्यरत कर्मचारियों को राहत मिल सकती है।
8. एरियर का मिल सकता है बड़ा भुगतान
यदि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाती हैं और उनका क्रियान्वयन बाद में होता है, तो कर्मचारियों को पिछली अवधि का एरियर भी मिल सकता है। ऐसे में कई कर्मचारियों के खाते में एकमुश्त बड़ी राशि आने की संभावना बन सकती है। हालांकि इसकी पुष्टि अंतिम सरकारी आदेश जारी होने के बाद ही होगी।

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