राज्य सरकार ने इस अभियान को जनभागीदारी से जोड़ते हुए सभी विभागों, जनप्रतिनिधियों, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों को इसमें शामिल होने का आह्वान किया है। इसके लिए विभागवार जिम्मेदारियां भी तय कर दी गई हैं।
विभिन्न विभागों को दिए गए लक्ष्य
पौधरोपण अभियान में सबसे बड़ी जिम्मेदारी वन विभाग को सौंपी गई है, जिसे 15.50 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य मिला है। वहीं ग्राम्य विकास विभाग 10 करोड़, कृषि विभाग 3.25 करोड़, उद्यान विभाग 1.50 करोड़ और पंचायती राज विभाग 1.22 करोड़ पौधे लगाएगा। इसके अलावा अन्य विभाग भी अपने-अपने निर्धारित लक्ष्य के अनुसार अभियान में भाग लेंगे।
सालभर चलेंगे विशेष हरित अभियान
12 जुलाई के महाअभियान के बाद भी राज्य सरकार वर्षभर विभिन्न अवसरों पर पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित करेगी। इनमें 15 अगस्त पर वंदे मातरम् वाटिका, रक्षाबंधन पर भाई-बहन पौधरोपण और 5 सितंबर को एक पेड़ गुरु के नाम अभियान शामिल हैं। इसके अलावा मिशन छाया, अविरल धारा पौधरोपण, सहजन भंडारा और आम भंडारा जैसी योजनाओं के माध्यम से भी हरियाली बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
गंगा एक्सप्रेसवे किनारे भी होगा हरित
सरकार ने इस बार सड़क किनारे हरियाली बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया है। गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे 5.50 लाख पौधे लगाए जाएंगे, ताकि भविष्य में यह मार्ग हरित कॉरिडोर के रूप में विकसित हो सके। इसके साथ ही समरस वन, समृद्धि वन, कृषि वन, ऊर्जा वन और कपि वन जैसी नई अवधारणाओं पर भी काम किया जाएगा।
13 प्रमुख नदियों के किनारे पौधरोपण
वन विभाग ने प्रदेश की 13 प्रमुख नदियों के किनारे बड़े पैमाने पर पौधरोपण की तैयारी पूरी कर ली है। गंगा, यमुना, सरयू, गोमती सहित अन्य नदियों के तट से पांच किलोमीटर की परिधि में हजारों स्थानों का चयन किया गया है। इस क्षेत्र में 3.83 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जाएंगे, जिससे नदी तटीय क्षेत्रों में हरियाली बढ़ेगी और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी।
पौधों की सुरक्षा पर भी रहेगा विशेष ध्यान
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अभियान का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड संख्या में पौधे लगाना नहीं, बल्कि उनकी नियमित सिंचाई, सुरक्षा और संरक्षण भी सुनिश्चित करना है। एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्गों, गोआश्रय स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर लगाए जाने वाले पौधों की देखभाल के लिए संबंधित विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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