बाढ़ और सूखे के कारण लिया गया फैसला
बिहार के कई जिलों में बाढ़ के कारण खरीफ फसल को नुकसान पहुंचा है, जबकि कुछ इलाकों में कम बारिश से सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। ऐसी स्थिति में खेती से जुड़े काम कम होने के कारण ग्रामीण मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने निर्धारित अवधि में भी योजना के काम जारी रखने का निर्णय लिया है, ताकि मजदूरों को अपने गांव में ही काम मिल सके और उन्हें दूसरे राज्यों में पलायन न करना पड़े।
बाढ़ प्रभावित जिलों में मिलेगी प्राथमिकता
बाढ़ से प्रभावित 22 जिलों में क्षतिग्रस्त ग्रामीण सड़कों की मरम्मत, तटबंधों की देखभाल, जल निकासी और सामुदायिक संपत्तियों को ठीक करने जैसे कार्यों पर ध्यान दिया जाएगा। इन कार्यों से एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर मजदूरों के लिए काम के अवसर भी पैदा होंगे।
सूखा प्रभावित इलाकों में भी मिलेगा काम
कम बारिश से प्रभावित 16 जिलों में जल संरक्षण, पानी जमा करने और सिंचाई से संबंधित संरचनाओं के निर्माण जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ भविष्य में पानी की समस्या से निपटने में भी मदद मिल सकती है।
मजदूरों को क्या होगा फायदा?
पहले 22 अक्टूबर से 10 दिसंबर तक योजना के तहत काम बंद रखने का प्रावधान था। लेकिन मौजूदा प्राकृतिक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने इसमें छूट दे दी है। इससे ग्रामीण मजदूरों को इस अवधि में भी काम मिलने का रास्ता खुला है। हालांकि, रोजगार पाने के लिए संबंधित योजना के नियमों और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध स्वीकृत कार्यों के अनुसार प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

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