1. खाता नंबर नहीं होने पर होगा सुधार
ऑनलाइन जमाबंदी में खाता संख्या दर्ज नहीं होने पर सबसे पहले मूल जमाबंदी रजिस्टर की स्कैन कॉपी की जांच की जाएगी। यदि उसमें भी जानकारी नहीं मिलती है, तो खतियान से मिलान किया जाएगा। दाखिल-खारिज के बाद बनी जमाबंदी में खाता नंबर गायब होने पर संबंधित वाद पंजी और दूसरे उपलब्ध दस्तावेजों की मदद ली जाएगी। इसके बाद भी जानकारी नहीं मिलने पर जमीन मालिक से संपर्क कर उनके अधिकार से जुड़े प्रमाण मांगे जा सकते हैं।
2. खेसरा नंबर की गड़बड़ी होगी दूर
जिन जमाबंदियों में खेसरा या प्लॉट नंबर दर्ज नहीं है, उनमें भी रिकॉर्ड सुधारने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए मूल जमाबंदी रजिस्टर, खतियान और दाखिल-खारिज से संबंधित दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा। यदि सरकारी रिकॉर्ड से सही खेसरा संख्या की पुष्टि नहीं होती है, तो संबंधित रैयत से जमीन के स्वामित्व और अधिकार से जुड़े दस्तावेज लिए जा सकते हैं।
3. जमीन के रकबे की त्रुटि भी होगी ठीक
कई मामलों में ऑनलाइन जमाबंदी में जमीन का कुल क्षेत्रफल यानी रकबा दर्ज नहीं है या उसकी जानकारी स्पष्ट नहीं है। ऐसे मामलों में पुराने रजिस्टर में दर्ज खेसरावार रकबे और अन्य राजस्व अभिलेखों के आधार पर सुधार किया जाएगा। विभाग का उद्देश्य है कि जमीन के रिकॉर्ड में सही क्षेत्रफल दर्ज हो, ताकि भविष्य में जमीन से जुड़े कामकाज के दौरान अनावश्यक परेशानी न हो।
4. जरूरत पड़ने पर जमीन की मापी और जांच
यदि किसी जमीन का कुछ हिस्सा पहले ही जमाबंदी से हटाया जा चुका है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि कटौती किस खेसरा से हुई है, तो मामले की जांच की जाएगी। इसके लिए जमीन मालिक से जानकारी लेने के साथ भौतिक सत्यापन कराया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर जमीन की मापी भी होगी, जिससे रिकॉर्ड में सही विवरण दर्ज करने में मदद मिलेगी।
जमीन मालिक अपने दस्तावेज रखें तैयार
जमाबंदी में किसी तरह की गड़बड़ी होने पर जमीन मालिकों के लिए पुराने जमीन संबंधी कागजात, खतियान और दाखिल-खारिज के दस्तावेज उपयोगी हो सकते हैं। यदि उपलब्ध सरकारी अभिलेखों से जमीन का विवरण स्पष्ट नहीं होता है, तो विभाग संबंधित रैयत से अपने अधिकार का प्रमाण मांग सकता है।
हालांकि, म्यूनिसिपल सर्वे खतियान में खाता संख्या नहीं होने के कारण कायम कुछ जमाबंदियों में सुधार की जरूरत नहीं मानी गई है। वहीं, भूलवश बिना खाता संख्या के किए गए दाखिल-खारिज से संबंधित मामलों के लिए विभाग अलग से निर्देश जारी करेगा। ऐसे मामलों की पहचान करने को अंचलाधिकारियों से कहा गया है।
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