पांच साल का अनुभव होना जरूरी
नए प्रावधान के अनुसार, संबंधित शिक्षक के पास कम से कम पांच वर्ष का अनुभव होना चाहिए। साथ ही, कार्यवाहक प्रधानाचार्य के रूप में उनकी जिम्मेदारी निभाने की पुष्टि भी जरूरी होगी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) इन दोनों पहलुओं की जांच करेंगे। पात्रता सुनिश्चित होने के बाद ही नियमानुसार प्रधानाचार्य के पद का वेतन दिलाया जाएगा।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद नियम
यह बदलाव हाईकोर्ट के आदेशों के बाद किया गया है। शासन ने 16 जुलाई को जारी अपने पुराने आदेश के एक प्रावधान को हटाकर नया नियम शामिल किया है। अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे संबंधित शिक्षकों के अनुभव और कार्य की जांच कर पात्र लोगों को निर्धारित लाभ दिलाना सुनिश्चित करें।
शिक्षकों को क्या होगा फायदा?
इस फैसले से उन शिक्षकों को आर्थिक राहत मिल सकती है, जो विद्यालयों में प्रधानाचार्य का अतिरिक्त दायित्व निभा रहे हैं। अब पात्र शिक्षकों के अनुभव और कार्य की जांच के बाद प्रधानाचार्य पद के वेतन का लाभ देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

0 comments:
Post a Comment