किन जमीनों पर रहेगी प्रशासन की नजर?
जांच में गैरमजरूआ आम और खास जमीन, खासमहाल भूमि, सरकार के अधीन बकाश्त जमीन, भू-हदबंदी में मिली अतिरिक्त भूमि, कैसर-ए-हिन्द और सार्वजनिक सैरात की जमीन शामिल हो सकती है। ऐसे मामलों में यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित व्यक्ति के नाम जमाबंदी किस आधार पर दर्ज की गई थी।
पुराने दस्तावेजों की भी होगी पड़ताल
जांच के दौरान खतियान, सरकारी भूमि रजिस्टर, बंदोबस्ती और पट्टे से जुड़े आदेश, जमीन अधिग्रहण के कागजात, पुराने राजस्व फैसले और अदालत के आदेश देखे जाएंगे। केवल किसी जमीन की श्रेणी या रिकॉर्ड में दर्ज एक प्रविष्टि के आधार पर जमाबंदी को अवैध घोषित नहीं किया जाएगा। वैध अधिकार का दावा करने वाले व्यक्ति के दस्तावेजों पर भी विचार होगा।
बिना सुनवाई रद्द नहीं होगी जमाबंदी
यदि जांच में जमाबंदी बनाए जाने में नियमों के उल्लंघन की आशंका मिलती है, तो अंचल अधिकारी को तथ्यों और प्रमाणों के साथ प्रस्ताव अपर समाहर्त्ता के पास भेजना होगा। इसके बाद बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 की धारा 9 और संबंधित नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
संबंधित जमीन मालिक या दूसरे पक्षों को अपना पक्ष रखने और सबूत पेश करने का मौका देना जरूरी होगा। सक्षम प्राधिकारी के आदेश के बाद ही नियमानुसार राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव किया जाएगा। इसलिए जमीन से जुड़े कागजात सुरक्षित रखना और जमाबंदी के आधार को स्पष्ट रखना महत्वपूर्ण है।
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