एक रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राज्य अमेरिका , रूस और चीन इस रेस में सबसे आगे हैं। जबकि छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने के लिए जापान , इटली , यूनाइटेड किंगडम , फ्रांस , जर्मनी , स्पेन और स्वीडन सहयोगी बहुराष्ट्रीय कार्यक्रमों में एक साथ शामिल हुए हैं।
बता दें की यह लड़ाकू विमान उच्च शक्ति वाले माइक्रोवेव और लेजर हथियार से लैस होंगे। ये विमान इतना स्टील्थ होगा की इसे रडार से नहीं पकड़ा जा सकेगा। इसे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैनन जैसे अडवांस तकनीकों से लैस किया जायेगा। छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को 2030 के दशक तक आने की उम्मीद हैं।
अमेरिकी कंपनी बोइंग, लॉकहीड मार्टिन ने छठी पीढ़ी के विमान विकास परियोजनाओं की घोषणा की है। वहीं, रूस छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान का निर्माण करने जा रहा है, जिसका नाम मिग-41 रखा गया है। जबकि चीन भी इसतरह का विमान विकसित करने की योजना पर काम कर रहा हैं।

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