दरअसल, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के हाल ही में नवगठित उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा आयोग में विलय के बाद शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया ठप पड़ गई थी। पहले यह जिम्मेदारी संयुक्त शिक्षा निदेशक (JED) की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति की थी। लेकिन अब शासन ने माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1921 का हवाला देते हुए यह जिम्मेदारी सीधे DIOS को सौंप दी है।
नई व्यवस्था के तहत क्या बदला?
पूर्व में शिक्षक पदोन्नति की प्रक्रिया लंबी और जटिल थी। एक समिति, जिसमें JED, संबंधित DIOS और एक राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य शामिल होते थे, प्रमोशन की फाइलों पर निर्णय लेती थी। लेकिन अब DIOS को अधिकार दिए जाने के बाद न केवल प्रक्रिया में तेजी आएगी, बल्कि जिलास्तर पर पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
अगस्त 2023 से अटकी थीं फाइलें
नए आयोग के गठन और चयन बोर्ड के उसमें विलय के बाद, अगस्त 2023 से पूरे प्रदेश में पदोन्नति की प्रक्रिया रुक गई थी। हजारों शिक्षकों की फाइलें संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालयों में पड़ी थीं। लेकिन अब इन्हें वापस DIOS कार्यालयों को भेजा जा रहा है, जिससे प्रक्रिया दोबारा शुरू हो सके।
शिक्षक संगठनों ने जताई संतुष्टि
माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व एमएलसी सुरेश कुमार त्रिपाठी ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, "यह आदेश पहले ही आ जाना चाहिए था। वर्षों से प्रमोशन न होने के कारण शिक्षक सिर्फ आर्थिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी परेशान थे।"
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