केंद्र सरकार का 1 बड़ा फैसला, देशभर में यह योजना लागू

नई दिल्ली। देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय ने म्यूचुअल क्रेडिट गारंटी योजना (MCGS-MSME) में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं, जिससे खासतौर पर निर्माताओं और निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

क्या हैं बड़े बदलाव

नई व्यवस्था के तहत अब योजना में कई अहम सुधार किए गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि सेवा क्षेत्र को भी योजना के दायरे में शामिल कर लिया गया है, जिससे ज्यादा उद्यम इसका फायदा उठा सकेंगे। इसके अलावा, उपकरण और मशीनरी की लागत की सीमा को पहले के 75% से घटाकर अब परियोजना लागत का 60% कर दिया गया है। वहीं, चौथे वर्ष के बाद 5% अग्रिम योगदान की अनुमति दी गई है, जिससे उद्यमों को वित्तीय प्रबंधन में लचीलापन मिलेगा।

गारंटी और लोन से जुड़ी अहम जानकारी

संशोधित योजना के अनुसार:

गारंटीकृत ऋण राशि: अधिकतम 20 करोड़ रुपये

अग्रिम योगदान: ऋण राशि का 2% (अधिकतम 40 लाख रुपये)

गारंटी कवरेज: डिफॉल्ट राशि का 75%

गारंटी शुल्क: पहले वर्ष शून्य, इसके बाद हर साल 0.50%

एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब क्रेडिट गारंटी की अवधि 10 साल तय कर दी गई है, जबकि पहले इसकी कोई निश्चित समयसीमा नहीं थी।

कौन उठा सकता है लाभ

इस योजना का लाभ वे MSME यूनिट्स ले सकती हैं, जो लाभ में हैं और पिछले तीन वित्तीय वर्षों में हर साल अपनी कुल बिक्री का कम से कम 25% निर्यात कर चुकी हैं। इसके साथ ही निर्यात प्राप्ति से जुड़ी शर्तों को भी पूरा करना होगा।

लागू होने की तारीख

आपको बता दें की नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी (NCGTC) ने इस संशोधित योजना को 24 फरवरी 2026 से लागू कर दिया है।

MSME सेक्टर की अहमियत

भारत की अर्थव्यवस्था में MSME सेक्टर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र देश के GDP में करीब 30% योगदान देता है, जबकि निर्यात में इसकी हिस्सेदारी 45% से अधिक है। साथ ही, करोड़ों लोगों को रोजगार देने में भी इसका बड़ा योगदान है।

इस योजना का क्या होगा असर?

जानकारों के मुताबिक, इस संशोधन से MSMEs को मशीनरी और उपकरण खरीदने के लिए ऋण आसानी से मिल सकेगा। इससे न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि भारत के निर्यात और विनिर्माण क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी। केंद्र सरकार का यह फैसला MSME सेक्टर को अधिक प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में भी सहायक हो सकता है।

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