मनमानी कीमतों पर लगेगी रोक
अब तक प्रदेश के विभिन्न विकास प्राधिकरण अपनी योजनाओं के तहत संपत्तियों की कीमतें खुद तय करते थे, जिससे कई बार दरें इतनी अधिक हो जाती थीं कि आम लोगों की पहुंच से बाहर हो जाती थीं। सरकार अब इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए एक स्पष्ट और पारदर्शी नीति लागू करने जा रही है, जिससे कीमतों का निर्धारण तय मानकों के आधार पर होगा।
गैर-जरूरी शुल्क होंगे खत्म
नई नीति के तहत संपत्तियों की लागत में शामिल कई अतिरिक्त और गैर-जरूरी शुल्कों को समाप्त करने की योजना है। इससे कुल लागत में कमी आएगी और मकान या फ्लैट की कीमतें स्वाभाविक रूप से कम होंगी। साथ ही विकास दरों में भी संशोधन किया जाएगा, जिससे परियोजनाओं का खर्च नियंत्रित रह सके।
‘आदर्श कास्टिंग गाइडलाइन’
सरकार पहले ही ‘आदर्श कास्टिंग गाइडलाइन’ को मंजूरी दे चुकी है, जिसके तहत पुरानी संपत्तियों की कीमत तय करने के तरीके में बदलाव किया गया है। इसमें ब्याज, कंटीजेंसी और ओवरहेड चार्ज की दरों को सीमित किया गया है, जिससे पुराने आवासों की कीमतों में कमी देखने को मिली है। अब इसी मॉडल को नई परियोजनाओं में भी लागू करने की तैयारी है।
छोटे मकानों पर रहेगा खास फोकस
सरकार विशेष रूप से ईडब्ल्यूएस (EWS), एलआईजी (LIG) और मिनी एमआईजी श्रेणी के मकानों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। ये वही वर्ग हैं जिनकी जरूरत आम और मध्यम वर्गीय परिवारों को सबसे ज्यादा होती है। अधिकारियों का मानना है कि बड़े मकानों की तुलना में छोटे घरों की कीमत कम रखना ज्यादा जरूरी है, ताकि अधिक से अधिक लोग अपने घर का सपना पूरा कर सकें।
योजनाओं से जोड़ा जाएगा कई लाभ
सरकार इस नई नीति को प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी से जोड़ने पर भी विचार कर रही है। इससे पात्र लाभार्थियों को अतिरिक्त सब्सिडी और वित्तीय सहायता मिल सकेगी, जिससे घर खरीदना और भी आसान हो जाएगा।

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