इस बार सीधा मुकाबला सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच माना जा रहा है। एक तरफ ममता बनर्जी चौथी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही हैं, तो दूसरी ओर बीजेपी बंगाल में पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के इरादे से मैदान में है।
बहुमत का गणित और बीजेपी का बड़ा लक्ष्य
बंगाल में सरकार बनाने के लिए 148 सीटों का आंकड़ा पार करना जरूरी है। बीजेपी ने इस बार 160 सीटों का लक्ष्य रखा है, जो उसके आक्रामक चुनावी रुख को दर्शाता है। पिछले चुनावों पर नजर डालें तो 2021 में TMC ने 215 सीटों के साथ बड़ी जीत दर्ज की थी, जबकि बीजेपी 77 सीटों पर सिमट गई थी। वहीं 2016 में बीजेपी का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा था। ऐसे में इस बार पार्टी किसी भी कीमत पर बड़ा उछाल चाहती है।
बीजेपी की रणनीति: आक्रामक अभियान
भारतीय जनता पार्टी इस बार पूरी ताकत से चुनाव लड़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को बड़ा चेहरा बनाया गया है, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था को मुख्य मुद्दा बनाया गया है, हिंदुत्व आधारित ध्रुवीकरण के जरिए वोट बैंक मजबूत करने की कोशिश। बीजेपी को उम्मीद है कि सत्ता विरोधी माहौल और केंद्र की योजनाओं का लाभ उसे मिलेगा।
टीएमसी के सामने चुनौतियां ही चुनौतियां
तृणमूल कांग्रेस के लिए यह चुनाव आसान नहीं माना जा रहा। इनके सामने मुख्य चुनौतियां: सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इनकंबेंसी), भ्रष्टाचार के आरोप, बेरोजगारी और विकास के सवाल, पार्टी के अंदर गुटबाजी। ममता बनर्जी को इस बार केवल चुनाव नहीं, बल्कि अपनी छवि और संगठन दोनों को बचाने की चुनौती है।
वोटर लिस्ट और SIR का असर
इस चुनाव में मतदाता सूची का मुद्दा भी बड़ा बन गया है। SIR के तहत बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का असर खासतौर पर शहरी क्षेत्रों में देखा जा रहा है। इससे TMC को नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि नाराज मतदाता चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।
भ्रष्टाचार के आरोप बने बड़ा मुद्दा
टीएमसी पर पिछले कुछ वर्षों में कई घोटालों के आरोप लगे हैं, जिन्हें बीजेपी चुनावी मंच से जोर-शोर से उठा रही है। शिक्षक भर्ती घोटाला, पीडीएस और अन्य मामलों ने पार्टी की छवि को प्रभावित किया है। इन आरोपों से निपटना ममता बनर्जी के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
क्या कहता है सर्वे?
हाल में आये ताज़ा सर्वे में संकेत मिल रहे हैं कि मुकाबला इस बार पहले से कहीं ज्यादा कड़ा हो सकता है। TMC अब भी मजबूत स्थिति में है, खासकर ग्रामीण इलाकों में, लेकिन बीजेपी ने शहरी और सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत की है। सीटों का अंतर कम होने की संभावना जताई जा रही है।

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