बिहार में मुखिया जी की बढ़ी ताकत, सरकार ने दिए अधिकार

पटना। बिहार के ग्रामीण इलाकों में किसानों की एक बड़ी समस्या लंबे समय से जंगली जानवरों के कारण फसल बर्बादी रही है। खासकर नीलगाय और जंगली सुअर जैसे जानवर रातों-रात खेतों को नुकसान पहुंचा देते हैं, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। अब इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है।

सरकार का बड़ा कदम

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग ने नया आदेश जारी करते हुए ग्राम पंचायत के मुखिया को विशेष अधिकार दिए हैं। अब मुखिया अपने क्षेत्र के उन इलाकों में, जहां जंगल नहीं हैं, फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले जंगली जानवरों को नियंत्रित करने की अनुमति दे सकेंगे। यह निर्णय वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत लिया गया है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कार्रवाई नियमों के दायरे में हो।

सीधे शिकार की अनुमति नहीं

सरकार ने साफ किया है कि कोई भी आम व्यक्ति सीधे इन जानवरों को नहीं मार सकता। इसके लिए प्रशिक्षित और लाइसेंसधारी शूटरों की मदद ली जाएगी। इससे न केवल सुरक्षा बनी रहेगी, बल्कि प्रक्रिया भी नियंत्रित और जिम्मेदार तरीके से पूरी होगी।

शूटरों का पैनल तैयार

इस काम के लिए सरकार विशेष शूटरों का एक पैनल तैयार कर रही है। इसमें शामिल होने के लिए उम्मीदवारों को अपने लाइसेंस, निशानेबाजी का अनुभव और अन्य जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि आवेदक के खिलाफ कोई आपराधिक मामला न हो।

आवेदन की प्रक्रिया

इच्छुक उम्मीदवारों को अपना आवेदन स्पीड पोस्ट या रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से पटना स्थित अरण्य भवन में भेजना होगा। सभी आवेदनों की जांच के बाद योग्य शूटरों की सूची तैयार की जाएगी।

किसानों को बड़ी राहत की उम्मीद

इस फैसले से उन किसानों को काफी राहत मिलने की संभावना है, जो हर साल जंगली जानवरों के कारण अपनी फसल का बड़ा हिस्सा गंवा देते हैं। अब मुखिया के अधिकार और प्रशिक्षित शूटरों की मदद से इस समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।

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