भवानीपुर: TMC का गढ़ या BJP की चुनौती?
भवानीपुर विधानसभा सीट को लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस (TMC) का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। यहां से ममता बनर्जी कई बार जीत दर्ज कर चुकी हैं। हालांकि, इस बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सुवेंदु अधिकारी को मैदान में उतारकर मुकाबले को सीधा और कड़ा बना दिया है।
दिलचस्प मुकाबले की वजह
पिछले उपचुनाव में ममता बनर्जी ने बीजेपी उम्मीदवार को बड़े अंतर से हराया था। वहीं, नंदीग्राम सीट पर सुवेंदु अधिकारी पहले ही ममता को मात दे चुके हैं। ऐसे में यह मुकाबला “प्रतिष्ठा की लड़ाई” बन चुका है, जहां दोनों नेता अपनी-अपनी सियासी ताकत साबित करना चाहेंगे।
‘मिनी भारत’ क्यों कहलाता है भवानीपुर?
दक्षिण कोलकाता की यह सीट अपनी विविधता के लिए जानी जाती है। करीब 40% मतदाता गैर-बंगाली समुदाय से हैं (गुजराती, मारवाड़ी, पंजाबी, उड़िया), यहां लगभग 20% मुस्लिम वोटर हैं। इस मिश्रित जनसंख्या के कारण यहां चुनावी समीकरण बेहद जटिल हो जाते हैं। आम तौर पर गैर-बंगाली वोटर्स का झुकाव BJP की ओर माना जाता है, जबकि TMC का पारंपरिक आधार स्थानीय और अल्पसंख्यक वोटर्स में मजबूत है।
इस बार SIR का असर: किसे फायदा?
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद इस सीट से हजारों नाम हटाए गए हैं। BJP इसे फर्जी वोटरों की सफाई बता रही है, जबकि TMC इसे असली वोटरों के हटने का मुद्दा बना रही है। इस मुद्दे ने भवानीपुर की लड़ाई को और पेचीदा बना दिया है।
लोकसभा चुनाव के आंकड़े बढ़ा रहे टेंशन
हालांकि विधानसभा उपचुनाव में TMC ने बड़ी जीत हासिल की थी, लेकिन हालिया लोकसभा चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि यहां उसका बढ़त अंतर काफी कम हो गया है। इससे मुकाबला पहले से ज्यादा करीबी माना जा रहा है।
भवानीपुर सीट का क्या है राजनीतिक इतिहास?
भवानीपुर सीट का गठन 2009 के परिसीमन के बाद हुआ और तब से यहां TMC का दबदबा रहा है। 2011, 2016 और उपचुनावों में ममता बनर्जी ने यहां जीत दर्ज की। इस सीट को उनकी राजनीतिक पहचान का मजबूत आधार भी माना जाता है।
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