1 .अमेरिकी डॉलर (USD)
अमेरिकी डॉलर अभी भी वैश्विक मुद्रा बाजार में सबसे प्रमुख "रिजर्व करेंसी" है। वैश्विक विदेशी मुद्रा लेनदेन में लगभग 89.2% का हिस्सा डॉलर में होता है। कच्चे तेल, सोना और अन्य वस्तुओं का अंतरराष्ट्रीय व्यापार मुख्य रूप से इस मुद्रा में ही होता है। यही कारण है कि अधिकांश देशों की विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर का प्रभुत्व बना हुआ है।
2 .यूरो (EUR)
यूरोपीय संघ के 20 देशों की साझा मुद्रा यूरो दुनिया की दूसरी सबसे ज्यादा व्यापार होने वाली मुद्रा है। इसका वैश्विक विदेशी मुद्रा लेनदेन में लगभग 28.9% हिस्सा है। अंतरराष्ट्रीय भुगतान और व्यापार के लिए यह डॉलर के बाद सबसे विश्वसनीय विकल्प माना जाता है।
3 .जापानी येन (JPY)
जापान की येन एशिया की सबसे महत्वपूर्ण मुद्राओं में से एक है। वैश्विक विदेशी मुद्रा लेनदेन में इसका हिस्सा 16.8% है। यह मुद्रा एशियाई बाजारों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, खासकर तकनीकी और विनिर्माण उद्योग से जुड़े कारोबार में।
चीनी युआन (CNY) – उभरती चुनौती
हालांकि अभी चीनी युआन वैश्विक स्तर पर डॉलर और यूरो के मुकाबले कम इस्तेमाल होती है, लेकिन यह तेजी से अपनी जगह बना रही है। BIS के अप्रैल 2025 और 2026 के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार युआन अब वैश्विक व्यापार में 5वीं सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली मुद्रा बन गई है। इसने चौथे स्थान पर मौजूद ब्रिटिश पाउंड (GBP) के साथ अंतर को काफी कम कर दिया है।
विदेशी मुद्रा लेनदेन में चीनी युआन का हिस्सा बढ़कर 8.8% तक पहुंच गया है। चीन के सीमा-पार व्यापार का 54.3% हिस्सा युआन में निपटाया जा रहा है, जो अमेरिका डॉलर पर निर्भरता कम करने की चीन की रणनीति का हिस्सा है। हालांकि अभी डॉलर से मुकाबला करना बहुत दूर की बात है।

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