जेनेटिक फैक्टर और डायबिटीज
वैज्ञानिकों के अनुसार, टाइप 2 डायबिटीज में जेनेटिक यानी वंशानुगत कारक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर पिता या माता में से किसी को यह रोग है, तो उनके बच्चों में भी इसके विकसित होने की संभावना अधिक होती है।
अध्ययन बताते हैं कि: यदि पिता को टाइप 2 डायबिटीज है, तो बच्चों में बीमारी का खतरा लगभग 40% तक हो सकता है। अगर माता को डायबिटीज है, तो यह संभावना और बढ़कर 50% तक हो जाती है। दोनों माता-पिता को डायबिटीज होने पर बच्चों में इस रोग के विकसित होने का खतरा 70% तक पहुँच सकता है।
जीवनशैली का असर
हालांकि जेनेटिक्स महत्वपूर्ण है, लेकिन डायबिटीज केवल आनुवंशिक नहीं होती। हमारी जीवनशैली भी इसमें बड़ा योगदान देती है। अस्वस्थ खान-पान, शारीरिक सक्रियता की कमी, मोटापा, और अत्यधिक तनाव डायबिटीज के खतरे को बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि:
नियमित व्यायाम और संतुलित आहार से टाइप 2 डायबिटीज के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट का सीमित सेवन, फल और सब्जियों का अधिक उपयोग, और पर्याप्त पानी पीना बेहद जरूरी है।
नियमित जांचें ज़रूरी
यदि आपके माता-पिता को शुगर है, तो नियमित स्वास्थ्य जांचें करना अत्यंत आवश्यक है। ब्लड शुगर लेवल, HbA1c, और कोलेस्ट्रॉल की जांच समय-समय पर करवाएं। शुरुआती चेतावनी संकेतों में अधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, थकान, और वजन में अचानक बदलाव शामिल हैं।

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