बिहार में बड़ी राहत: अब कम जमीन पर भी बन सकेंगी बिल्डिंग्स

पटना। बिहार के शहरों में जमीन की कमी और तेजी से बढ़ती आबादी ने सरकार को निर्माण नियमों में बदलाव के लिए प्रेरित किया है। अब राज्य में ऐसे नियम लागू करने की तैयारी है, जिससे कम क्षेत्रफल वाले प्लॉट पर भी बहुमंजिला और ज्यादा स्पेस वाली इमारतें खड़ी की जा सकेंगी।

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के अनुसार, नगर विकास विभाग ने इसको लेकर प्रस्ताव तैयार कर लिया है और इसे जल्द ही कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही यह नए नियम पूरे राज्य में लागू कर दिए जाएंगे।

FAR बढ़ाने की तैयारी

इस बदलाव का केंद्र बिंदु है फ्लोर एरिया रेशियो (FAR)। अभी तक बिहार के शहरी इलाकों में FAR की सीमा लगभग 2.5 से 3 के बीच थी, जिसके कारण भवन निर्माण की ऊंचाई और आकार सीमित रह जाता था। नए प्रस्ताव के तहत इसे बढ़ाकर 5.5 से 6 तक करने की योजना है। इस बदलाव के लागू होने के बाद लोग अपनी छोटी जमीन पर भी पहले की तुलना में ज्यादा मंजिलें और बड़े स्पेस वाली बिल्डिंग बना सकेंगे।

निर्माण नियमों में मिलेगी ढील

नई नीति में केवल FAR ही नहीं बढ़ाया जा रहा, बल्कि भवन निर्माण से जुड़े अन्य नियमों में भी राहत दी जा रही है। खासतौर पर ‘सेटबैक’ नियमों में ढील देने का प्रस्ताव है, जिससे जमीन का ज्यादा हिस्सा निर्माण के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। अब तक जहां केवल 40 प्रतिशत जमीन पर निर्माण की अनुमति थी, वहीं नए नियमों के तहत 60 से 70 प्रतिशत तक जमीन पर निर्माण संभव हो सकेगा। इससे छोटे प्लॉट पर भी बड़े फ्लैट्स, कॉम्प्लेक्स और दुकानों का निर्माण आसान हो जाएगा।

मध्यम वर्ग और व्यापारियों को फायदा

इस फैसले से सबसे ज्यादा फायदा मध्यम वर्ग और छोटे निवेशकों को होगा। शहरों में जमीन की बढ़ती कीमतों के कारण अपना घर या व्यवसायिक भवन बनाना मुश्किल होता जा रहा था। नए नियमों के बाद लोग कम जमीन में ही बेहतर और बड़ा निर्माण कर पाएंगे। खासकर व्यापारियों के लिए यह बदलाव फायदेमंद साबित हो सकता है, क्योंकि अब व्यस्त बाजारों में भी मल्टी-स्टोरी शोरूम और कॉम्प्लेक्स बनाना आसान होगा।

वर्टिकल डेवलपमेंट की ओर कदम

सरकार का यह कदम शहरों को ‘वर्टिकल डेवलपमेंट’ की दिशा में ले जाने वाला माना जा रहा है। यानी अब शहर फैलने के बजाय ऊंचाई में विकसित होंगे। इससे जमीन की कमी की समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकेगा और शहरी ढांचे को आधुनिक रूप मिलेगा।

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