क्या है नई व्यवस्था?
नई योजना के तहत 15 से 28 सीटों वाली मिनी बसों को गांवों से जिला मुख्यालय तक चलाने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, इन बसों को एक जिले से दूसरे जिले में जाने की इजाजत नहीं होगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है।
परिवहन विभाग बस मालिकों के साथ 10 साल का अनुबंध करेगा, जिसे आगे बढ़ाया भी जा सकता है। किसी दुर्घटना की स्थिति में मुआवजा और बीमा का पूरा जिम्मा बस स्वामी का होगा।
हर ब्लॉक में दो बसों का लक्ष्य
सरकार ने हर विकासखंड में कम से कम दो बसें चलाने का लक्ष्य तय किया है। प्रदेश के करीब 825 विकासखंडों में 1600 से ज्यादा बसों के संचालन की तैयारी है। इससे दूर-दराज के गांवों में रहने वाले लोगों को भी नियमित परिवहन सुविधा मिल सकेगी।
बस संचालन की जिम्मेदारी मालिक पर
इस योजना की खास बात यह है कि बस का संचालन पूरी तरह वाहन स्वामी के जिम्मे होगा। ड्राइवर, कंडक्टर, समय सारणी और किराया तय करने का अधिकार भी मालिक के पास रहेगा, लेकिन किराया राज्य परिवहन प्राधिकरण द्वारा निर्धारित सीमा के भीतर ही रखना होगा।
जरूरी शर्तें और नियम
बसों की अधिकतम उम्र 8 साल तय की गई है
डीजल, सीएनजी या इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जा सकता है
हर बस को संबंधित गांव से रोज कम से कम दो फेरे लगाने होंगे
बस मालिक को आवेदन शुल्क, सिक्योरिटी राशि और मासिक शुल्क जमा करना होगा
“मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन सेवा 2026” का हिस्सा
यह योजना मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन सेवा 2026 के तहत शुरू की जा रही है। प्रदेश के लगभग 59 हजार गांवों को बेहतर परिवहन सुविधा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। पहले इस योजना में टैक्स और परमिट दोनों में छूट की बात थी, लेकिन अब केवल परमिट से छूट दी जाएगी, जबकि बस मालिकों को टैक्स देना होगा।

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