समय पर उपस्थिति नहीं तो वेतन पर असर
सरकार ने साफ कर दिया है कि यदि कोई कर्मचारी बिना वैध कारण के देर से आता है और उसके अवकाश खाते में छुट्टी उपलब्ध नहीं है, तो उस अवधि का वेतन काटा जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि अब लेटलतीफी सिर्फ चेतावनी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका आर्थिक असर भी पड़ेगा।
उपस्थिति के आधार पर बनेगा वेतन
नई व्यवस्था के तहत सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि कर्मचारियों का वेतन बिल केवल उपस्थिति रिकॉर्ड के आधार पर ही तैयार किया जाए। अगर इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही होती है, तो संबंधित अधिकारी भी जिम्मेदार माने जाएंगे और उन पर कार्रवाई की जाएगी।
बायोमेट्रिक सिस्टम पर सख्ती
सरकार पहले से ही बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू कर चुकी है, लेकिन अब इसे और कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी कर्मचारियों की उपस्थिति डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से ट्रैक की जाएगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
औचक निरीक्षण से निगरानी
मुख्य सचिव ने सभी विभागाध्यक्षों और जिला अधिकारियों को निर्देश दिया है कि नियमित रूप से औचक निरीक्षण किए जाएं। यदि किसी कार्यालय में कर्मचारी अनुपस्थित पाए जाते हैं या कामकाज में लापरवाही दिखती है, तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
दफ्तरों के समय में स्पष्टता
सरकारी कार्यालयों के लिए समय भी निर्धारित कर दिया गया है। पांच दिवसीय कार्य सप्ताह वाले कार्यालय सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक संचालित होंगे, जबकि दोपहर 1:00 से 2:00 बजे तक भोजन अवकाश रहेगा। महिला कर्मचारियों के लिए कार्य समय शाम 5:00 बजे तक तय किया गया है।
वहीं कुछ क्षेत्रीय कार्यालयों जैसे प्रमंडलीय आयुक्त, महाधिवक्ता और मुख्य अभियंता कार्यालयों में छह दिन का कार्य सप्ताह लागू रहेगा। यहां सामान्य दिनों में समय सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक और सर्दियों में सुबह 10:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक निर्धारित किया गया है।
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