अब तक क्यों नहीं मिल पाता था फायदा?
बिहार में सरकारी खरीद की व्यवस्था ज्यादातर राज्य सरकार के जिम्मे रही है, जिसे विकेंद्रीकृत खरीद प्रणाली (DCP) कहा जाता है। इसी वजह से धान और गेहूं की खरीद तो नियमित रूप से होती रही, लेकिन दलहन और तिलहन फसलें इस सिस्टम का हिस्सा नहीं बन पाईं। इसके अलावा, केंद्र और राज्य के बीच औपचारिक समझौते की कमी और खरीद ढांचे की सीमाएं भी बड़ी वजह मानी जाती हैं।
केंद्र की नई रणनीति का असर
अब केंद्र सरकार का ध्यान देश को दलहन और तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने पर है। इसी दिशा में राज्यों को भी MSP खरीद बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अगर बिहार इस प्रक्रिया को मजबूत तरीके से लागू करता है, तो किसानों को सीधा फायदा मिल सकता है।
APMC खत्म होने के बाद बदली तस्वीर
बिहार में APMC मंडी व्यवस्था 2006 के बाद खत्म कर दी गई थी। इसके बाद किसानों के लिए संगठित बाजार प्रणाली कमजोर हो गई और कई जगहों पर उन्हें अपनी फसल बिचौलियों को बेचनी पड़ी। इससे कीमतों पर भी असर पड़ा।
किसानों के लिए क्या बदलेगा?
अगर नई व्यवस्था सही तरीके से लागू होती है, तो किसानों को कई फायदे मिल सकते हैं—
दलहन और तिलहन की सरकारी खरीद शुरू होगी
MSP पर बिक्री के मौके बढ़ेंगे
बाजार में बिचौलियों की पकड़ कम होगी
किसानों की आमदनी में सुधार की उम्मीद होगी

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