क्यों बदली गई व्यवस्था
अब तक सभी स्कूलों में प्रेरणा पोर्टल के माध्यम से एक समान समय सारिणी लागू की जाती थी। लेकिन कई विद्यालयों में शिक्षकों की कमी या अनुपस्थिति के कारण पढ़ाई बाधित होती थी। इसी समस्या को देखते हुए शिक्षा विभाग ने यह लचीली व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है, ताकि हर स्कूल अपनी जरूरत के अनुसार पढ़ाई का बेहतर संचालन कर सके।
स्कूल स्तर पर होगा निर्णय
नई व्यवस्था के तहत विद्यालय के प्रधानाध्यापक या इंचार्ज प्रधानाध्यापक ही कक्षा और विषय के अनुसार टाइम टेबल तय करेंगे। शिक्षकों की उपलब्धता के आधार पर कक्षाओं का विभाजन और पढ़ाने की जिम्मेदारी भी निर्धारित की जाएगी, जिससे कोई भी कक्षा खाली न रहे।
पीरियड की समय सीमा तय
हालांकि टाइम टेबल में लचीलापन दिया गया है, लेकिन पढ़ाई की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कुछ नियम तय किए गए हैं। प्रत्येक पीरियड की अवधि 40 मिनट होगी। कक्षा की शुरुआत पिछले पाठ की पुनरावृत्ति से होगी, इसके बाद विषय की पढ़ाई और अंत में पुनः संक्षेप में समझाया जाएगा, ताकि छात्रों की समझ मजबूत हो सके।
मुख्य विषयों पर विशेष जोर
प्राथमिक विद्यालयों में भाषा और गणित के अध्ययन को प्राथमिकता दी गई है, जबकि उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में गणित, अंग्रेजी और विज्ञान का प्रतिदिन कम से कम एक पीरियड अनिवार्य किया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों की बुनियादी शैक्षणिक क्षमता को मजबूत करना है।
मध्यान्ह भोजन के लिए तय समय
विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन (मिड-डे मील) के लिए 30 मिनट का समय निर्धारित किया गया है, ताकि बच्चों को व्यवस्थित तरीके से भोजन मिल सके और पढ़ाई का समय भी प्रभावित न हो।
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