अब तक जमीन के कागजों की जांच में काफी समय लगता था और कई मामलों में त्रुटियां भी सामने आती थीं। नई तकनीक लागू होने के बाद दस्तावेजों की ऑटोमेटेड जांच संभव हो सकेगी, जिससे कम समय में अधिक सटीक परिणाम मिलेंगे। इससे आम रैयतों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
बनाई गई विशेष समिति
इस दिशा में आगे बढ़ते हुए विभाग ने एक पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। यह समिति AI के उपयोग की संभावनाओं, तकनीकी पहलुओं और इसके प्रभाव का विस्तृत अध्ययन करेगी। जरूरत पड़ने पर तकनीकी विशेषज्ञों की भी मदद ली जाएगी और उसके आधार पर सरकार को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
क्यों जरूरी हुई नई व्यवस्था
विभाग को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि जमीन के दस्तावेजों, खतियान और सर्वे रिकॉर्ड में गड़बड़ियां हो रही हैं। कई मामलों में फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन के लेन-देन की कोशिशें भी सामने आई हैं। हालांकि अधिकांश रिकॉर्ड डिजिटाइज किए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद त्रुटियों और धोखाधड़ी की समस्याएं पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई हैं।
बनेगा विस्तृत एसओपी
AI तकनीक लागू करने के लिए एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जाएगी। इसमें यह तय किया जाएगा कि किन दस्तावेजों की जांच किस तरीके से की जाएगी और AI द्वारा दिए गए परिणामों को किस स्तर पर प्रमाणिक माना जाएगा। इससे पूरी प्रक्रिया में स्पष्टता और एकरूपता आएगी।
अधिकारियों को मिलेगा प्रशिक्षण
नई तकनीक के सफल क्रियान्वयन के लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे वे AI आधारित प्रणाली का सही तरीके से उपयोग कर सकेंगे और जांच प्रक्रिया को प्रभावी बना पाएंगे। इस पहल से आम लोगों को सबसे बड़ा लाभ मिलेगा। जमीन के कागजों की जांच जल्दी और सही तरीके से होने से विवाद कम होंगे, फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और लोगों का भरोसा सरकारी व्यवस्था पर और मजबूत होगा।

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