15 जून 2026 को होगी नई सीरीज की शुरुआत
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, WPI की नई श्रृंखला को 15 जून 2026 से लागू किया जाएगा। इसी दिन सरकार पहली बार प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) भी जारी करेगी, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप एक नई व्यवस्था होगी। इस बदलाव से देश की महंगाई मापने की प्रणाली और अधिक आधुनिक और सटीक हो जाएगी।
WPI और PPI दोनों रहेंगे साथ-साथ
सरकार ने स्पष्ट किया है कि WPI को तुरंत बंद नहीं किया जाएगा। आने वाले 5 वर्षों तक WPI और PPI दोनों को साथ-साथ जारी किया जाएगा ताकि उद्योग और बाजार धीरे-धीरे नई प्रणाली को अपना सकें। इसके बाद WPI को पूरी तरह बंद करने की योजना है, जिससे PPI मुख्य सूचकांक बन जाएगा।
वैश्विक मानकों की ओर भारत का कदम
PPI को अपनाना अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली के अनुरूप माना जा रहा है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि उत्पादन स्तर पर कीमतों में बदलाव कैसे अंतिम उत्पादों तक पहुंचता है। यह बदलाव भारत की आर्थिक डेटा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाएगा।
7 प्रमुख सेवाएं पहली बार शामिल
नई व्यवस्था में पहली बार 7 महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए भी सर्विस PPI जारी किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं, बैंकिंग, बीमा, रेलवे, टेलीकॉम, पेंशन फंड मैनेजमेंट, सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन, हवाई यात्री सेवाएं। इससे सेवा क्षेत्र की महंगाई को भी बेहतर तरीके से मापा जा सकेगा।
नए WPI में बढ़ा दायरा
नई WPI श्रृंखला में वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है। इससे महंगाई के आंकड़े अधिक व्यापक और सटीक होंगे। इसके साथ ही सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा जैसे आधुनिक ऊर्जा स्रोतों को भी पहली बार शामिल किया गया है।
ऊर्जा सेक्टर में बदलाव
कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस को अब ‘फ्यूल एंड पावर’ श्रेणी में शामिल किया गया है, जबकि पहले ये ‘प्राइमरी आर्टिकल्स’ में थे। इस बदलाव से डेटा वर्गीकरण अधिक संतुलित और स्पष्ट होगा।
कब आएंगे नए आंकड़े?
नई प्रणाली के तहत WPI और PPI के आंकड़े हर महीने जारी किए जाएंगे। 15 जून 2026 को मई 2026 के शुरुआती आंकड़ों के साथ-साथ पिछले 37 महीनों का बैक डेटा भी प्रकाशित किया जाएगा।

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