किसानों को कितना सब्सिडी
बिहार सरकार ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए कुल लागत का 60% तक का अनुदान दे रही है। अनुमानित लागत (लगभग ₹6.5 लाख प्रति हेक्टेयर) पर सरकार ₹2.70 लाख प्रति हेक्टेयर की सब्सिडी प्रदान करती है। यह राशि किस्तों में दी जाती है।
कम लागत में बेहतर उत्पादन
ड्रैगन फ्रूट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी खेती के लिए अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती। यह अपेक्षाकृत कम उपजाऊ भूमि में भी अच्छी पैदावार दे सकता है। ऐसे क्षेत्रों के किसान, जहां सिंचाई की सुविधा सीमित है, वे भी इसकी खेती कर सकते हैं। इसके अलावा मौसम की मार से होने वाले नुकसान का जोखिम भी कई पारंपरिक फसलों की तुलना में कम माना जाता है।
बाजार में लगातार बढ़ रही मांग
देश के बड़े शहरों, सुपरमार्केट और फल मंडियों में ड्रैगन फ्रूट की मांग लगातार बढ़ रही है। इसकी ऊंची बाजार कीमत किसानों को बेहतर मुनाफा दिलाने में मदद करती है। कई किसान इसे नकदी फसल के रूप में अपनाकर अच्छी कमाई कर रहे हैं।
प्रोसेसिंग और निर्यात में भी संभावनाएं
ड्रैगन फ्रूट का उपयोग केवल ताजे फल के रूप में ही नहीं बल्कि जूस, जैम, हेल्थ ड्रिंक और अन्य उत्पादों में भी किया जाता है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसकी मांग बढ़ रही है, जिससे भविष्य में निर्यात के अवसर और मजबूत हो सकते हैं।
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
ड्रैगन फ्रूट विकास योजना को कृषि क्षेत्र में बदलाव लाने वाली पहल माना जा रहा है। सरकारी अनुदान और बढ़ती बाजार मांग के कारण यह खेती किसानों के लिए लाभ का नया रास्ता खोल सकती है। जो किसान पारंपरिक फसलों के अलावा अतिरिक्त आय का स्रोत तलाश रहे हैं, उनके लिए यह एक आकर्षक विकल्प बनकर उभर रहा है।
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