पंचायती राज विभाग ने पंचायतों में तैनात प्रशासकों के अधिकार और जिम्मेदारियां स्पष्ट करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए हैं। इन दिशा-निर्देशों की फाइल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुमोदन के लिए भेजी गई है। मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलते ही नई व्यवस्था लागू की जा सकती है।
अधिकार स्पष्ट नहीं होने से आ रही थी परेशानी
प्रदेश में पहली बार निवर्तमान ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि प्रशासक के तौर पर कार्यभार संभालने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी समस्या यह थी कि उन्हें कौन-कौन से काम करने का अधिकार है, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं थी।
पहले से मंजूर विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार
प्रस्तावित दिशा-निर्देशों में पंचायतों के पहले से स्वीकृत विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की व्यवस्था की गई है। इसके तहत ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत में पहले से मंजूर प्रस्तावों पर काम जिलाधिकारी की अनुमति के बाद शुरू कराया जा सकेगा। इससे उन योजनाओं को दोबारा शुरू करने का रास्ता साफ होगा, जो प्रशासकों के अधिकार स्पष्ट नहीं होने के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही थीं।
नई योजनाओं के लिए भी तय होगी प्रक्रिया
जिला पंचायतों में विकास से जुड़ी नई कार्ययोजनाओं को जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे नई परियोजनाओं पर फैसला लेने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जा सकेगी। वहीं ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की कार्ययोजना को जिलाधिकारी की ओर से अनुमोदित किया जाएगा। इससे पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं को लेकर निर्णय लेने में स्पष्टता आने की उम्मीद है।
नीतिगत फैसलों में जिलाधिकारी की भूमिका
प्रस्तावित नियमों में ग्राम पंचायतों के नीतिगत मामलों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। ऐसे मामलों में निर्णय जिलाधिकारी के स्तर से लिए जाने की व्यवस्था होगी। इससे प्रशासकों को अपने अधिकार क्षेत्र को समझने में आसानी होगी और ऐसे मामलों में अनिश्चितता कम होगी, जिनका सीधा असर पंचायत की नीतियों या नई योजनाओं पर पड़ता है।

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