इस योजना का लाभ प्रदेश के करीब 14,152 दिव्यांग विद्यार्थियों को दिया जाएगा। छात्रों को यह सहायता एक महीने या दो महीने तक नहीं, बल्कि 10 महीने तक मिलेगी। इस हिसाब से प्रत्येक पात्र छात्र को शैक्षणिक अवधि में कुल 6,000 रुपये की मदद मिल सकती है। इस योजना के लिए प्रोजेक्ट एडवाइजरी बोर्ड की ओर से करीब 8.49 करोड़ रुपये का बजट उपलब्ध कराया गया है।
स्कूल पहुंचने का खर्च होगा कम
दिव्यांग बच्चों के लिए नियमित रूप से स्कूल पहुंचना कई बार बड़ी चुनौती बन जाता है। गंभीर दिव्यांगता या चलने-फिरने में परेशानी के कारण उन्हें स्कूल तक लाने और छुट्टी के बाद वापस घर पहुंचाने के लिए अभिभावकों को अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। एस्कार्ट भत्ते से इसी आर्थिक बोझ को कम करने का प्रयास किया गया है।
इन दिव्यांग विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
एस्कार्ट एलाउंस के लिए निर्धारित पात्रता के तहत गंभीर दिव्यांगता वाले विद्यार्थियों को शामिल किया गया है। इनमें पूर्ण दृष्टि दिव्यांग, बौद्धिक दिव्यांग, सेरेब्रल पाल्सी और बहु दिव्यांग बच्चों के अलावा जेई तथा एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से प्रभावित पात्र विद्यार्थी भी शामिल होंगे। यह सहायता परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट स्कूलों में अध्ययनरत पात्र दिव्यांग छात्रों के लिए लागू होगी।
अभिभावकों के खाते में आएगी रकम
एस्कार्ट भत्ते की राशि विद्यार्थियों के अभिभावकों के आधार लिंक बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी। इससे सहायता राशि सीधे बैंक खाते में पहुंचेगी और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी। स्कूली शिक्षा महानिदेशालय की ओर से इस संबंध में आवश्यक आदेश जारी किया गया है। संबंधित स्तर पर पात्र विद्यार्थियों की पहचान और योजना का लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
नियमित उपस्थिति पर रहेगा जोर
एस्कार्ट एलाउंस का एक अहम उद्देश्य सिर्फ आर्थिक सहायता देना ही नहीं, बल्कि दिव्यांग बच्चों की स्कूल में नियमित उपस्थिति बढ़ाना भी है। कई बार आने-जाने की सुविधा और खर्च की समस्या के कारण बच्चे नियमित रूप से विद्यालय नहीं पहुंच पाते। ऐसे में सरकार की यह सहायता अभिभावकों के लिए आर्थिक राहत के साथ बच्चों की शिक्षा जारी रखने में भी मददगार साबित हो सकती है।

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