हालांकि, जमीन मालिकों को बिक्री से पहले कुछ जरूरी नियमों का पालन करना होगा। सरकार की ओर से तय प्रक्रिया के तहत जमीन बेचने से पहले संबंधित विभाग को इसकी सूचना देना आवश्यक होगा। इसके साथ ही जमीन के हस्तांतरण का कारण भी बताना पड़ेगा।
जमीन बेचने से पहले देनी होगी सूचना
टाउनशिप के प्रस्तावित दायरे में आने वाली जमीन के मालिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि वे जमीन की बिक्री या हस्तांतरण से पहले नगर विकास एवं आवास विभाग को इसकी जानकारी देंगे। जमीन मालिक को यह भी स्पष्ट करना होगा कि वह अपनी जमीन क्यों बेचना या हस्तांतरित करना चाहता है। यानी अब बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन लेन-देन करने से पहले निर्धारित सरकारी प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होगा।
क्यों लगाई गई थी खरीद-बिक्री पर रोक?
पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप की योजना सामने आने के बाद संबंधित क्षेत्रों की जमीन में लोगों की दिलचस्पी बढ़ने लगी थी। सरकार को आशंका थी कि टाउनशिप परियोजना की जानकारी का फायदा उठाकर कुछ लोग बड़े पैमाने पर जमीन की सट्टेबाजी कर सकते हैं। जमीन की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए बिचौलियों की सक्रियता और अवैध लेन-देन की आशंका भी जताई गई थी। इसी कारण टाउनशिप के प्रस्तावित क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगाई गई थी।
1 अगस्त को जारी हुई अधिसूचना
नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से 1 अगस्त को औपचारिक अधिसूचना जारी कर खरीद-बिक्री पर लगी रोक हटाने की प्रक्रिया स्पष्ट की गई। अब जमीन मालिक निर्धारित शर्तों को पूरा करते हुए अपनी संपत्ति का लेन-देन कर सकेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य एक तरफ जमीन मालिकों को उनकी संपत्ति के इस्तेमाल और बिक्री की सुविधा देना है, तो दूसरी तरफ टाउनशिप परियोजना से जुड़े संभावित अनियमित लेन-देन पर नजर रखना भी है।
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