सरकार ने उन जनहित याचिकाओं का विरोध किया है, जिनमें SC और ST आरक्षण के दायरे में क्रीमी लेयर की व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। याचिकाओं में यह तर्क दिया गया है कि आरक्षण का लाभ उन परिवारों तक अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचना चाहिए, जो वास्तव में सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हैं।
केंद्र का क्या कहना है?
केंद्र सरकार के अनुसार, मौजूदा कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके आधार पर SC और ST आरक्षण में क्रीमी लेयर की अवधारणा लागू की जा सके। सरकार ने कहा कि क्रीमी लेयर की व्यवस्था मुख्य रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC) से जुड़े आरक्षण के संदर्भ में विकसित हुई है।
याचिकाकर्ताओं ने क्या मांग की है?
इस मामले में दाखिल याचिकाओं में आरक्षण के लाभ को लेकर अलग व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यदि किसी SC या ST परिवार का कोई सदस्य पहले ही संवैधानिक पद या किसी बड़े सरकारी पद तक पहुंच चुका है, तो उसके बच्चों को भी आरक्षण का लाभ लगातार मिलता रहना जरूरी नहीं होना चाहिए।
SC-ST सूची में बदलाव पर केंद्र ने क्या कहा?
केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की संवैधानिक सूची से जुड़े अधिकारों को भी स्पष्ट किया है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 341 और 342 के तहत SC और ST की सूची में किसी जाति या जनजाति को शामिल करने अथवा हटाने की प्रक्रिया में संसद की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार का कहना है कि राज्य स्तर पर किसी समुदाय की सामाजिक स्थिति को देखते हुए सूची में मनमाने तरीके से बदलाव नहीं किया जा सकता। सूची से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों का पालन करना जरूरी है।
पहचान सिर्फ आर्थिक स्थिति के आधार पर नहीं
केंद्र ने अपने पक्ष में आरक्षण से जुड़े पुराने न्यायिक फैसलों का भी उल्लेख किया है। सरकार के मुताबिक SC, ST और OBC की पहचान केवल किसी व्यक्ति या परिवार की आर्थिक स्थिति देखकर नहीं की जाती। इन वर्गों की पहचान के पीछे ऐतिहासिक, सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ापन जैसे व्यापक आधार होते हैं। केंद्र ने इंदिरा साहनी मामले यानी मंडल आयोग से जुड़े ऐतिहासिक फैसले का भी हवाला दिया है। सरकार का तर्क है कि SC-ST आरक्षण को केवल आय के पैमाने से जोड़ना संवैधानिक व्यवस्था की मूल प्रकृति को प्रभावित कर सकता है।
कल्याणकारी योजनाओं में आय सीमा का भी जिक्र
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि SC, ST और SEBC वर्गों के लिए संचालित कई कल्याणकारी योजनाओं में पहले से ही आय संबंधी पात्रता तय की गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ अपेक्षाकृत अधिक जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे।
सरकार ने याचिकाकर्ताओं के प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन-किन योजनाओं में बदलाव की आवश्यकता है और प्रस्तावित व्यवस्था से गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों को वास्तविक रूप से कितना लाभ मिलेगा।

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