1. कैंसर की दवाओं पर मुनाफे की सीमा तय
इस फैसले के तहत संबंधित दवाओं की बिक्री में ट्रेड मार्जिन 30 प्रतिशत तक सीमित रहेगा। इसका उद्देश्य दवा वितरण व्यवस्था में कीमतों को नियंत्रित करना और मरीजों को उचित दरों पर दवाएं उपलब्ध कराना है। यह व्यवस्था ड्रग्स (प्राइसेस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 के प्रावधानों के तहत लागू की गई है।
2. इलाज के खर्च में मिल सकती है राहत
कैंसर के इलाज में लंबे समय तक महंगी दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में कीमतों में कमी आने से मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। मंत्रालय के बयान के अनुसार, मौजूदा मूल्य संरचना के आधार पर कुछ दवाओं की खुदरा कीमतों में 70 प्रतिशत तक की कमी संभव है। हालांकि, वास्तविक बचत दवा के ब्रांड और उसकी मौजूदा कीमत पर निर्भर करेगी।
3. दवा कंपनियों को जारी करनी होगी नई मूल्य सूची
नई व्यवस्था के तहत दवा निर्माताओं को संशोधित कीमतों की सूची अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित करनी होगी और इसे खुदरा विक्रेताओं तथा अस्पतालों तक पहुंचाना होगा। इससे दवाओं की कीमतों को लेकर पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। दवाओं की सूची को जरूरत के अनुसार समय-समय पर अपडेट भी किया जा सकता है।
विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर लिया गया फैसला
यह कदम कैंसर विशेषज्ञों, चिकित्सा विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों वाली समिति की सिफारिशों के आधार पर उठाया गया है। इससे पहले 2019 में भी 42 कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन सीमित करने की पहल की गई थी। अब इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाकर 137 दवाओं तक किया गया है।

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