बच्चों के पोषण से जुड़ी हरियाली की मुहिम
बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कोई भी स्कूल इस योजना से वंचित न रहे। जिन स्कूलों में पर्याप्त जमीन नहीं है, वहां गमलों, बाल्टियों, बोरे या पालीबैग में सब्जियां उगाने का सुझाव दिया गया है। वहीं, जहां थोड़ा खुला स्थान है, वहां लौकी, तोरई जैसी बेलदार सब्जियां, और छत या बरामदे में टमाटर, मिर्च, धनिया, भिंडी, बैंगन जैसे पौधे लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
कन्वर्जेन्स से होगी स्थायी व्यवस्था
सरकार का लक्ष्य इस योजना को केवल शुरुआत तक सीमित न रखकर, इसे लंबे समय तक टिकाऊ बनाना है। इसके लिए अन्य विभागों की सहायता भी ली जाएगी। कृषि, ग्राम्य विकास, पंचायतीराज और मनरेगा जैसे विभाग इस कार्य में सहयोग देंगे ताकि हर स्कूल का गार्डन नियमित रूप से संभाला जा सके।
आंकड़े बताते हैं प्रगति और चुनौतियां
राज्य में अब तक 70,228 स्कूलों में किचन गार्डन तैयार किए जा चुके हैं। हालांकि कुछ जिलों जैसे सिद्धार्थनगर, जौनपुर, आजमगढ़, इटावा, कुशीनगर, बरेली और प्रतापगढ़ में यह संख्या अभी 25% से भी कम है। सरकार ने ऐसे जिलों के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि जल्द से जल्द सभी स्कूलों में गार्डन विकसित किए जाएं और पहले से बने गार्डनों का रखरखाव सुनिश्चित किया जाए। कुल मिलाकर प्रदेश के 62,347 स्कूलों में अभी और किचन गार्डन बनाए जाने हैं।
छोटा प्रयास, बड़ा बदलाव
इस पहल का असली उद्देश्य केवल सब्जी उगाना नहीं है, बल्कि बच्चों में प्रकृति के प्रति जुड़ाव, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करना है। बच्चे यदि अपने स्कूल में उगाई सब्जियां खाते हैं, तो उनमें पर्यावरण और स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी स्वाभाविक रूप से बढ़ेगा।

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