किस पर पड़ेगा असर
इन नए नियमों का सबसे ज्यादा असर नौकरीपेशा लोगों, मध्यम वर्ग के टैक्सपेयर्स और कंपनियों पर पड़ेगा। खासकर सैलरी स्ट्रक्चर, कंपनी से मिलने वाली सुविधाएं और अन्य लाभों के टैक्स की गणना अब पहले से ज्यादा स्पष्ट होगी।
टैक्स कैलकुलेशन होगा साफ
सरकार ने ऐसे फॉर्मूले तय किए हैं, जिनके आधार पर यह तय होगा कि किसी कर्मचारी को मिलने वाले लाभ का कितना हिस्सा टैक्स के दायरे में आएगा। इससे टैक्स गणना में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रम की स्थिति कम होगी।
रिटायरमेंट फंड पर नई सीमा
नए नियमों के तहत यदि किसी कर्मचारी के रिटायरमेंट फंड जैसे पीएफ, एनपीएस और सुपरएनुएशन में कंपनी का कुल योगदान सालाना 7.5 लाख रुपये से ज्यादा होता है, तो अतिरिक्त राशि पर टैक्स देना होगा। इतना ही नहीं, इस अतिरिक्त राशि से होने वाली कमाई भी टैक्स के दायरे में आएगी।
कंपनी घर और कार के नियम
कंपनी द्वारा दिए जाने वाले घर के टैक्स नियमों को भी स्पष्ट किया गया है। शहर की आबादी के आधार पर सैलरी का एक निश्चित प्रतिशत टैक्सेबल माना जाएगा। वहीं, कंपनी की कार का निजी और आधिकारिक उपयोग करने पर भी तय मासिक राशि को टैक्सेबल वैल्यू माना जाएगा। अगर कंपनी ड्राइवर उपलब्ध कराती है, तो अतिरिक्त राशि भी जोड़ी जाएगी।
गिफ्ट, खाना और लोन पर नियम
कंपनी से मिलने वाले गिफ्ट या वाउचर 15,000 रुपये तक टैक्स-फ्री रहेंगे, लेकिन इससे अधिक होने पर पूरी राशि टैक्सेबल होगी। ऑफिस में मिलने वाला भोजन ₹200 प्रति मील तक टैक्स-फ्री रहेगा। अगर कंपनी कर्मचारी को कम ब्याज या बिना ब्याज का लोन देती है, तो वह भी टैक्स के दायरे में आ सकता है। हालांकि: ₹2 लाख तक के लोन पर छूट मिलेगी, मेडिकल जरूरतों के लिए दिए गए लोन को भी राहत दी गई है।

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