पीएम की पहल और आपात बैठक
इस फैसले से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम नवमी के मौके पर आपात बैठक बुलाई। बैठक में मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जोखिम की स्थिति पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि घरेलू लोगों को महंगाई के इस संकट से बचाना प्राथमिकता है। इसके बाद वित्त और पेट्रोलियम मंत्रालय ने मिलकर इस कदम को रात भर काम करके अमली जामा पहनाया।
क्या बदल गया
1 .पेट्रोल पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क अब 3 रुपये प्रति लीटर है।
2 .डीजल पर एक्साइज ड्यूटी पूरी तरह से शून्य कर दी गई।
3 .डीजल निर्यात पर 21.5 रुपये प्रति लीटर का विंडफॉल टैक्स लगाया गया ताकि घरेलू आपूर्ति बनी रहे।
4 .एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर भी शुल्क बढ़ाया गया, ताकि विमान ईंधन की कमी न हो।
तेल कंपनियों को भी फायदा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि इस फैसले से सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को ऊंची कीमतों पर तेल खरीदने में मदद मिलेगी और उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। इससे देश में ईंधन की आपूर्ति बाधित नहीं होगी और आम जनता को लगातार ईंधन मिलेगा।
वैश्विक स्थिति और भारत
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने तेल बाजार पर दबाव डाला है। दुनिया के कुल तेल और गैस का करीब 20-25% हिस्सा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरता है, और भारत इसी मार्ग पर अपनी बड़ी तेल आपूर्ति निर्भर करता है। इस नई नीति से भारत न केवल घरेलू स्तर पर ईंधन संकट से बचेगा, बल्कि महंगाई पर भी नियंत्रण रहेगा।
आम नागरिक को लाभ
सरकार की यह पहल सीधे जनता की जेब पर असर कम करेगी। पेट्रोल-डीजल सस्ते होंगे, घरेलू आपूर्ति बाधित नहीं होगी और तेल कंपनियों को भी आर्थिक सहारा मिलेगा। इस कदम को एक सुरक्षा कवच की तरह देखा जा रहा है, जो वैश्विक तेल संकट के दौरान देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की सुरक्षा दोनों सुनिश्चित करेगा।

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