अबू मूसा की रणनीतिक अहमियत
अबू मूसा द्वीप, ईरान और यूएई से महज 40 मील की दूरी पर स्थित है। इसके नियंत्रण में आने वाला कोई भी देश हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी जहाजों और नावों पर नजर रख सकेगा। अमेरिका की नजर इस द्वीप के साथ-साथ छोटे और बड़े तुनब द्वीपों पर भी है।
समंदर में बढ़ती घेराबंदी
पिछले एक महीने से ईरान ने स्पीडबोट और ड्रोन के जरिए इस क्षेत्र में अमेरिकी और सहयोगी जहाजों को निशाना बनाया है। जवाब में अमेरिका ने अपने युद्ध पोत USS Tripoli को 2,200 मरीन के साथ ईरानी तट की ओर बढ़ा दिया है। इसके अलावा, 82वीं एयरबोर्न डिवीजन की तैनाती और अपाचे हेलीकॉप्टरों की लगातार गश्त ने खाड़ी के पानी में सुरक्षा और दबाव की स्थिति बना दी है।
ईरान की कड़ा संदेश
ईरान ने किसी भी तरह के अमेरिकी हमले या खाड़ी देशों के समर्थन पर अभूतपूर्व कार्रवाई की चेतावनी दी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने 10 लाख से अधिक सैनिकों को अलर्ट मोड पर रखा है, जिसमें ‘बसीज मिलिशिया’ भी शामिल है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उनका लक्ष्य अमेरिका या उसके सहयोगियों को किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई से रोकना है।
संधि या संघर्ष?
अगले 15 दिन इस तनावपूर्ण स्थिति की दिशा तय करेंगे। या तो अमेरिका और ईरान विवाद को बातचीत की मेज पर हल कर पाएंगे, या फिर अबू मूसा द्वीप विनाशकारी संघर्ष का केंद्र बन जाएगा। जानकार मानते हैं कि इस क्षेत्र में कोई भी गलती वैश्विक तेल और समुद्री व्यापार को प्रभावित कर सकती है।
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