1. 'डिफाइंड बेनिफिट पेंशन सिस्टम' की बहाली
RSCWS ने आग्रह किया है कि वर्तमान NPS और UPS स्कीम को एक 'गारंटीड पेंशन मॉडल' में बदला जाए। इसके तहत पेंशनर्स को महंगाई के असर से पूरी सुरक्षा मिलेगी। साथ ही हर पांच साल में पेंशन का अपने-आप संशोधन होने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे वर्तमान और भविष्य के रिटायर कर्मचारियों में समानता सुनिश्चित हो सके।
2. बेहतर फिटमेंट फैक्टर और DA की पूरी न्यूट्रलाइजेशन
सोसाइटी ने हाइब्रिड फिटमेंट फैक्टर के तहत स्वास्थ्य देखभाल, बीमा और डिजिटल सेवाओं को शामिल करने का सुझाव दिया है। इसके अलावा पेंशनर्स को महंगाई की पूरी भरपाई (100% DA न्यूट्रलाइजेशन) मिलने की मांग की गई है। सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए अलग मूल्य सूचकांक तैयार करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
3. मेडिकल और ट्रांसपोर्ट भत्तों में बढ़ोतरी
RSCWS ने फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) में वृद्धि और बुजुर्ग पेंशनर्स के लिए ट्रांसपोर्ट सपोर्ट की शुरुआत करने की सिफारिश की है। इसके अलावा पर्यटन महत्व वाले शहरों में HRA की उच्च श्रेणी में अपग्रेडेशन का सुझाव भी दिया गया है।
4. अतिरिक्त पेंशन की उम्र घटाकर 70 साल
अब तक अतिरिक्त पेंशन केवल 80 वर्ष की आयु के बाद मिलती थी, लेकिन RSCWS का प्रस्ताव है कि इसे 70 साल कर दिया जाए। इससे बुजुर्ग पेंशनर्स अपनी बढ़ती जीवन और चिकित्सा जरूरतों को आसानी से पूरा कर सकेंगे।
5. पेंशन विसंगतियों को खत्म करना
2016 से पहले और बाद रिटायर हुए कर्मचारियों के बीच असमानता को समाप्त करने के लिए 'मॉडिफाइड पैरिटी' लागू करने की सिफारिश की गई है। साथ ही क्षेत्र-विशेष वेतन बेंचमार्किंग अपनाकर सभी स्तरों पर निष्पक्षता सुनिश्चित करने का सुझाव भी दिया गया है।
6. कैशलेस सुविधाओं का विस्तार और बोनस रिवीजन
रेलवे पेंशनर्स के लिए CGHS जैसी कैशलेस सुविधाओं का विस्तार, सुदूर इलाकों में चिकित्सा पहुंच आसान बनाना और प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस की सीमा को अपडेट करने की मांग भी की गई है। इससे कर्मचारियों की अंतिम सैलरी और भविष्य की पेंशन में सुधार होगा।
RSCWS के ये सुझाव अगर लागू किए जाते हैं, तो पेंशनर्स की वित्तीय सुरक्षा और जीवन स्तर में बड़ा सुधार होगा। 8वें वेतन आयोग के तहत यह पहल पेंशनभोगियों के लिए एक नई उम्मीद और राहत लेकर आएगी।

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