20 लाख उपभोक्ता प्रभावित
राज्य में करीब 20 लाख ग्रामीण उपभोक्ता इस दायरे में आते हैं। इन लोगों का मुख्य व्यवसाय घर से ही चलता है और वे अपनी रोजमर्रा की आजीविका के लिए घरेलू बिजली का इस्तेमाल करते हैं। कई बार छोटी दुकान चलाने पर बिजली चोरी के मुकदमे तक दर्ज किए गए हैं, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई थी।
आयोग में उठाया गया मामला
यूपी राज्य विद्युत नियामक आयोग की नई दरों की सुनवाई में इस मामले को प्रमुखता से उठाया गया। 2019 में राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने भी यह प्रस्ताव रखा था कि ऐसे उपभोक्ताओं को कठोर वाणिज्यिक दरों के बजाय घरेलू श्रेणी में रखा जाए।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि आयोग को सुझाव दिया गया था कि दो किलोवॉट तक और 200 यूनिट तक बिजली खपत वाले ग्रामीण उपभोक्ताओं को कुछ शर्तों के साथ घरेलू दरों में रखा जा सकता है। हालांकि, अब तक इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
पावर कॉर्पोरेशन की भूमिका
इस मसले पर पावर कॉर्पोरेशन ने भी अपनी राय आयोग को भेजी है। उनके सुझाव के अनुसार, घरेलू श्रेणी में रहकर छोटे व्यवसाय करने वालों को राहत दी जा सकती है। आयोग ने इस विषय पर नोएडा, बरेली और बनारस में सुनवाई की है, जिसमें उपभोक्ता परिषद ने एक बार फिर यह मुद्दा उठाया।
सरकार से भी की गई मांग
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद सरकार से भी हस्तक्षेप की मांग कर रहा है ताकि ग्रामीण व्यवसायियों को बिजली दरों के मामले में स्थायी राहत मिल सके।

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