1. पशुपतिनाथ–बैद्यनाथ धाम कॉरिडोर
यह 250 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर से शुरू होकर बिहार के सुपौल, सहरसा, खगड़िया, मुंगेर और बांका जिलों से गुजरते हुए झारखंड के देवघर (बैद्यनाथ धाम) तक जाएगा। इससे यात्रा का समय वर्तमान 13–14 घंटे से घटकर मात्र 2–3 घंटे हो जाएगा। धार्मिक यात्रियों, नेपाल–भारत व्यापार और झारखंड के खनिज उद्योग को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा।
2. अमास–दरभंगा एक्सप्रेसवे
यह 189 किलोमीटर लंबा एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे गया, औरंगाबाद, जहानाबाद, पटना, वैशाली, समस्तीपुर और दरभंगा जिलों से होकर गुजरेगा। इससे उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। यात्रा का समय लगभग आधा हो जाएगा और झारखंड से आने-जाने वाले वाहनों के लिए सुविधा बढ़ेगी।
3. पटना–पूर्णिया एक्सप्रेसवे
282 किलोमीटर लंबा 6-लेन ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट पटना से शुरू होकर पूर्णिया तक जाएगा। भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया चल रही है। इससे पटना से पूर्णिया की दूरी अब केवल 3 घंटे में तय हो सकेगी। सीमांचल क्षेत्र के उद्योग, व्यापार और एयरपोर्ट कनेक्टिविटी को भी मदद मिलेगी।
4. रांची–पटना 4-लेन हाईवे
323 किलोमीटर लंबा यह प्रोजेक्ट रांची, हजारीबाग, बारही और कोडरमा होते हुए पटना तक पहुंचेगा। इससे दोनों राज्यों की राजधानी के बीच यात्रा का समय कम होगा। झारखंड के खनिज उद्योग और बिहार के कृषि–औद्योगिक क्षेत्रों को भी फायदा मिलेगा।
5. औरंगाबाद–बरवाअड्डा 6-लेन हाईवे
222 किलोमीटर लंबा यह मार्ग बिहार के औरंगाबाद से झारखंड-बिहार बॉर्डर होते हुए बरवाअड्डा तक जाएगा। इससे खनिज और औद्योगिक सामग्री के परिवहन में तेजी आएगी। दिल्ली–कोलकाता कॉरिडोर से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और दोनों राज्यों के बीच ट्रैफिक दबाव कम होगा।

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