यूपी में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, टेंशन दूर!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लागू होने के बाद बिजली उपभोक्ताओं की चिंताएं लगातार बढ़ रही थीं। नई व्यवस्था के तहत अब उपभोक्ताओं को पहले रिचार्ज कर बिजली उपयोग करनी होती है, जिससे कई लोगों के सामने आर्थिक संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो गया था। खासकर उन उपभोक्ताओं के लिए परेशानी ज्यादा थी, जिन पर पुराना बकाया भी जुड़ा हुआ था।

प्रीपेड सिस्टम से बदला बिजली का तरीका

स्मार्ट प्रीपेड मीटर के जरिए अब बिजली उसी हिसाब से मिलती है, जितना उपभोक्ता रिचार्ज कराते हैं। बैलेंस खत्म होते ही कनेक्शन स्वतः कट जाता है और दोबारा सप्लाई तभी शुरू होती है जब रिचार्ज किया जाए। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य बकाया खत्म करना और बिलिंग सिस्टम को पारदर्शी बनाना है, लेकिन शुरुआत में इसने उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा दी।

बकाया समायोजन में मिली राहत

उपभोक्ताओं की दिक्कतों को देखते हुए पावर कॉरपोरेशन ने बकाया वसूली का तरीका आसान कर दिया है। अब पूरा बकाया एक बार में काटने के बजाय धीरे-धीरे समायोजित किया जाएगा।

10 हजार रुपये तक के बकाया पर हर रिचार्ज का केवल 10% हिस्सा कटेगा

10 से 15 हजार तक बकाया होने पर 15% राशि समायोजित होगी

15 से 20 हजार के बीच बकाया पर 25% कटौती होगी

इस व्यवस्था से उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, क्योंकि उनका पूरा रिचार्ज एक साथ पुराने बिल में नहीं जाएगा और उन्हें वर्तमान बिजली उपयोग के लिए बैलेंस भी मिलेगा।

जीरो बैलेंस की समस्या और समाधान

स्मार्ट मीटर लागू होने के बाद कई उपभोक्ताओं का बैलेंस अचानक शून्य हो गया, जिससे उनके कनेक्शन कट गए। बड़ी संख्या में लोगों को इस स्थिति का सामना करना पड़ा। इसे देखते हुए विभाग ने नई व्यवस्था लागू की है, ताकि उपभोक्ताओं को तुरंत राहत मिल सके।

आंशिक भुगतान पर अस्थायी कनेक्शन

यदि किसी उपभोक्ता का कनेक्शन बकाया के कारण कट जाता है, तो वह कुल बकाया का 50% जमा करके तीन दिनों के लिए अस्थायी रूप से बिजली सप्लाई बहाल करा सकता है। हालांकि, यह सुविधा केवल एक बार ही मिलेगी और निर्धारित समय के भीतर पूरा रिचार्ज करना जरूरी होगा।

उपभोक्ताओं ने उठाई मुआवजे की मांग

स्मार्ट मीटरिंग लागू होने के बाद कई उपभोक्ताओं को रिचार्ज करने के बावजूद कनेक्शन जुड़ने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस पर उपभोक्ता संगठनों ने आवाज उठाई है और ऐसे मामलों में मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि तय समय के भीतर कनेक्शन बहाल न होने पर उपभोक्ताओं को आर्थिक भरपाई मिलनी चाहिए।

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