बेरोजगारी दर में मामूली सुधार
हालिया आंकड़ों के अनुसार, फरवरी महीने में बेरोजगारी दर घटकर 4.9 प्रतिशत रह गई है, जो जनवरी में 5 प्रतिशत थी। यह संकेत देता है कि रोजगार के मोर्चे पर थोड़ी राहत मिली है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के आंकड़ों में अंतर देखने को मिला। शहरों में बेरोजगारी दर अपेक्षाकृत अधिक रही, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह स्थिर बनी रही। महिलाओं के बीच बेरोजगारी दर में भी गिरावट दर्ज की गई है, जो श्रम बाजार में धीरे-धीरे सुधार का संकेत देती है।
थोक महंगाई में लगातार बढ़ोतरी
दूसरी ओर, थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई फरवरी में बढ़कर 2.13 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह लगातार चौथा महीना है जब थोक महंगाई में वृद्धि दर्ज की गई है। इस बढ़ोतरी के पीछे खाद्य पदार्थों, गैर-खाद्य वस्तुओं और औद्योगिक उत्पादों की कीमतों में इजाफा मुख्य कारण माना जा रहा है। हालांकि, सब्जियों की कीमतों में कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन दाल, आलू, अंडे और अन्य जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़े हैं।
अलग-अलग संकेत दे रहे आंकड़े
एक तरफ रोजगार के मोर्चे पर हल्की सकारात्मक स्थिति दिख रही है, वहीं महंगाई का दबाव बढ़ना आम लोगों के लिए चिंता का विषय बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि महंगाई इसी तरह बढ़ती रही तो इसका असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है, जबकि रोजगार में सुधार अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।
नीतिगत फैसलों पर असर
महंगाई और रोजगार से जुड़े ये आंकड़े भविष्य की आर्थिक नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक पहले ही खुदरा महंगाई को ध्यान में रखते हुए ब्याज दरों में कटौती कर चुका है। ऐसे में आगे की नीतियां भी इन आंकड़ों पर निर्भर कर सकती हैं।

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