लगभग 6 लाख शिक्षकों को मिलेगा लाभ
शिक्षा विभाग के इस फैसले से राज्य के प्रारंभिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग 5.97 लाख शिक्षकों को लाभ मिलेगा। पहले कई बार वेतन मिलने में देरी हो जाती थी, जिससे शिक्षकों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब नई व्यवस्था लागू होने से ऐसी समस्याओं में कमी आने की उम्मीद है।
शिक्षा विभाग ने जिलों को दिए सख्त निर्देश
शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्द्र ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (स्थापना) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिक्षकों के वेतन भुगतान में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि वेतन भुगतान में विलंब पाया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
मानक प्रक्रिया का पालन करना होगा अनिवार्य
शिक्षकों के वेतन भुगतान को व्यवस्थित बनाने के लिए विभाग ने पहले से एक मानक कार्यप्रणाली (SOP) तय की हुई है। यह एसओपी 8 दिसंबर 2025 को प्राथमिक शिक्षा निदेशक के हस्ताक्षर से जारी की गई थी। सभी जिलों को इसकी प्रति भेज दी गई है और निर्देश दिया गया है कि वेतन भुगतान इसी प्रक्रिया के अनुसार समय पर किया जाए।
संस्कृत और मदरसा शिक्षकों को भी मिलेगा समान लाभ
नई व्यवस्था केवल सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों तक सीमित नहीं है। इसके तहत अल्पसंख्यक विद्यालयों, मदरसों और संस्कृत विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को भी हर महीने की पहली तारीख को वेतन देने की व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके अलावा इन संस्थानों में कार्यरत रात्रि प्रहरियों को भी इसी दिन वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
नई व्यवस्था से बिहार में शिक्षकों को नहीं करना पड़ेगा इंतजार
इस फैसले से शिक्षकों को वेतन के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। नियमित और समय पर वेतन मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी और वे अपने कार्य पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। राज्य सरकार का यह कदम शिक्षकों के हित में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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