क्या था प्रेस नोट-3 का नियम
कोरोना महामारी के दौरान वर्ष 2020 में सरकार ने प्रेस नोट-3 लागू किया था। इसके तहत भारत की सीमा से लगे देशों से आने वाले किसी भी निवेश के लिए सरकार की मंजूरी अनिवार्य कर दी गई थी। इस नियम का उद्देश्य भारतीय कंपनियों को सस्ते में खरीदने की कोशिशों को रोकना था। उस समय चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान जैसे देशों से आने वाले निवेश पर कड़ी निगरानी रखी गई थी।
भारत में चीन का निवेश कितना
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 तक भारत में आए कुल विदेशी निवेश में चीन की हिस्सेदारी बहुत कम रही है। इस अवधि में चीन से लगभग 2.51 अरब डॉलर का निवेश आया, जो कुल निवेश का करीब 0.32 प्रतिशत है। इस आधार पर भारत में निवेश करने वाले देशों की सूची में चीन 23वें स्थान पर है।
बढ़ता व्यापार घाटा
आर्थिक आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024-25 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़कर लगभग 99.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। वहीं चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले दस महीनों में यह घाटा करीब 92.3 अरब डॉलर दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निवेश के नियम कुछ आसान होते हैं तो भारत में पूंजी के साथ-साथ नई तकनीक भी आ सकती है।
विनिर्माण क्षेत्र को फायदा
सरकार का मानना है कि निवेश बढ़ने से देश में कारखानों और उद्योगों का विस्तार होगा। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और देश में बनने वाले उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में सरकार निगरानी और सावधानी बनाए रखेगी। विदेशी निवेश से जुड़े नियमों में किया गया यह बदलाव भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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