11.8 किलोमीटर लंबी सड़क
मथुरा और वृंदावन के बीच लगभग 11.8 किलोमीटर लंबा रेलवे ट्रैक था, जो पहले मीटर गेज लाइन के रूप में इस्तेमाल होता था। बाद में इसे ब्रॉडगेज में बदलने की योजना बनाई गई थी। वर्ष 2023 में जब इस पर काम शुरू हुआ तो स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि नई रेल लाइन बनने से शहर के कई हिस्सों में अंडरपास और फुट ओवरब्रिज बनने पड़ेंगे, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और शहर दो भागों में बंट सकता है।
प्रदेश सरकार ने दी है मंजूरी
राज्य सरकार की बैठक में इस परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद अब प्रशासन ने इसकी प्रक्रिया तेज कर दी है। योजना के अनुसार बंद पड़ी रेलवे लाइन की जमीन का उपयोग सड़क निर्माण के लिए किया जाएगा। इससे मथुरा और वृंदावन के बीच आवागमन काफी आसान हो जाएगा।
भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया
रेलवे ने इस जमीन को लोक निर्माण विभाग को देने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया है। फिलहाल प्रशासन इस जमीन का मूल्यांकन कर रहा है। इसके बाद राज्य सरकार या तो रेलवे को इसके बदले दूसरी जमीन देगी या फिर तय मूल्य के अनुसार भुगतान करेगी।
जल्द शुरू हो सकता है कार्य
अधिकारियों के अनुसार अगले तीन से चार महीनों में भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। इसके बाद सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
पर्यटन और यातायात को फायदा
मथुरा और वृंदावन देश के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में गिने जाते हैं। चार लेन सड़क बनने से दोनों शहरों के बीच यात्रा आसान होगी और यहां आने वाले श्रद्धालुओं व पर्यटकों को भी बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही स्थानीय लोगों को जाम की समस्या से भी काफी हद तक निजात मिल सकती है।

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